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Kulgam Terror Attack: रोटी कमाने जम्मू-कश्मीर गया था दीपक, आतंकियों की गोली ने उजाड़ दिया पूरा परिवार; छत्तीसगढ़ के मजदूर पर पहली आतंकी वारदात

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम आतंकी हमले में सक्ती जिले के 21 वर्षीय मजदूर दीपक रात्रे की मौत। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, मुख्यमंत्री ने जताया शोक। पढ़ें पूरी मार्मिक रिपोर्ट।

August 1, 2026 5:23 AM
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सक्ती। सिर्फ 21 साल की उम्र… आंखों में बेहतर भविष्य के सपने… पत्नी और मासूम बच्चे की जिम्मेदारी… इन्हीं उम्मीदों के साथ छत्तीसगढ के सक्ती जिले के एक छोटे से गांव का युवक हजारों किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर मजदूरी करने गया था। लेकिन किसे पता था कि रोजी-रोटी की तलाश में शुरू हुआ यह सफर आतंकियों की गोली पर जाकर खत्म हो जाएगा।

शुक्रवार रात जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले में सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड की ग्राम पंचायत बुंदेली के रहने वाले 21 वर्षीय दीपक रात्रे की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस दर्दनाक घटना ने न केवल एक परिवार का सहारा छीन लिया, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया है। जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के मजदूर पर इस तरह का यह पहला आतंकी हमला माना जा रहा है। घटना को लेकर छत्तीसगढ़ में भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आयी है।

रोजगार की तलाश में गया था, मौत की खबर बनकर लौटा

दीपक रात्रे, पिता उमाशंकर रात्रे, करीब एक वर्ष पहले अपने परिवार के साथ मजदूरी करने जम्मू-कश्मीर गया था। वह वहां एक ईंट-भट्ठे पर काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। उसके साथ उसकी पत्नी और भाई भी मजदूरी कर रहे थे।परिवार को उम्मीद थी कि दीपक मेहनत कर कुछ पैसे जोड़कर घर लौटेगा, लेकिन शुक्रवार रात आई एक खबर ने सब कुछ बदल दिया। आतंकियों की गोली ने उस युवा की जिंदगी छीन ली, जो अपने परिवार की उम्मीदों का सबसे मजबूत सहारा था।

मामा के गांव में बीता बचपन, वहीं हुई थी शादी

ग्रामीणों के अनुसार, दीपक बचपन से ही अपने मामा के गांव हरदीडीह में रहकर पढ़ाई करता था। यहीं उसकी परवरिश हुई और बाद में उसकी शादी भी हरदीडीह में ही हुई। आज वही गांव, जहां कभी दीपक की हंसी गूंजती थी, वहां सिर्फ सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है।

पत्नी और मासूम बच्चे को छोड़ गया दीपक

दीपक अपने पीछे पत्नी और एक मासूम बच्चे को छोड़ गया है। घर के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव वालों का कहना है कि दीपक परिवार की आर्थिक रीढ़ था। बेहतर जीवन और दो वक्त की रोटी के लिए उसने अपना घर छोड़ा था, लेकिन अब उसका परिवार असहाय हो गया है।घटना की जानकारी मिलने के बाद जैजैपुर पुलिस हरदीडीह पहुंची और परिजनों को इस दुखद खबर की सूचना दी। जैसे ही यह खबर परिवार तक पहुंची, पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। बुंदेली और हरदीडीह गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

नाना और मामा ने सरकार से लगाई गुहार

दीपक के नाना और मामा ने छत्तीसगढ़ सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार से परिवार को उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उनका कहना है कि दीपक ही पूरे परिवार की आजीविका का मुख्य आधार था। अब उसकी पत्नी और मासूम बच्चे के भविष्य की जिम्मेदारी सरकार को भी समझनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने जताया शोक

इस हृदयविदारक घटना पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत दीपक रात्रे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

एक गोली ने कई जिंदगियां बदल दीं

कुलगाम में चली आतंकियों की एक गोली ने सिर्फ दीपक की जान नहीं ली, बल्कि एक पत्नी का सुहाग, एक मासूम बच्चे के सिर से पिता का साया और बुजुर्ग माता-पिता का सहारा भी छीन लिया। रोजी-रोटी की तलाश में घर से निकला यह युवा अब कभी लौटकर नहीं आएगा। उसकी अधूरी उम्मीदें और परिवार के टूटे सपने इस घटना की सबसे दर्दनाक तस्वीर बन गए हैं।

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