बिना सहमति प्रतिनियुक्ति पर भेजने के मामले में हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 के आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई है।
बिलासपुर। प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने से पहले कर्मचारी की सहमति जरूरी है। हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये अहम निर्देश दिये हैं। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए एक कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति आदेश को अगली सुनवाई तक के लिए रोक लगा दी है। दरअसल पूरा मामला जगदलपुर नगर निगम के एक कर्मचारी से जुड़ा है।
जगदलपुर नगर निगम के एक कर्मचारी को उसकी सहमति के बिना बिलासपुर नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को जारी प्रतिनियुक्ति आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।इस आदेश के जरिए कर्मचारी को नगर निगम जगदलपुर से नगर निगम बिलासपुर में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था। हाई कोर्ट ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल प्रतिनियुक्ति आदेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला गोविंदनारायण सिंह विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य का है। इसकी सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत में हुई।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज चौहान ने पक्ष रखा। शासन की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा वर्मा, जबकि प्रतिवादी क्रमांक 2 और 3 की ओर से अधिवक्ता ए.एस. कछवाहा उपस्थित हुए।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के समक्ष दलील दी कि छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58(5) और 58(6) में एक नगर निगम से दूसरे नगर निगम में कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति को लेकर प्रावधान किए गए हैं।
उनका कहना था कि सामान्य परिस्थितियों में किसी कर्मचारी को दूसरे नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए उसकी सहमति आवश्यक होती है।
शासन ने कर्मचारी की सहमति को लेकर क्या कहा?
याचिका का शासन की ओर से विरोध किया गया। शासन ने अधिनियम की धारा 58(5) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी करने से पहले संबंधित कर्मचारी की सहमति लेना अनिवार्य नहीं है।
इस तरह मामले में मुख्य विवाद इस बात को लेकर सामने आया कि नगर निगम कर्मचारी को दूसरे नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए उसकी सहमति जरूरी है या नहीं।
हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इस तथ्य पर विचार किया कि याचिकाकर्ता को उसकी सहमति के बिना प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।
हालांकि, कोर्ट ने धारा 58(5) और 58(6) की अंतिम व्याख्या को लेकर फिलहाल कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत ने अंतरिम व्यवस्था के तहत 4 अगस्त 2026 के प्रतिनियुक्ति आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।
चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने मामले को करीब चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। फिलहाल अंतरिम आदेश के चलते याचिकाकर्ता को प्रतिनियुक्ति के संबंध में राहत मिल गई है।
अंतिम रूप से कर्मचारी की सहमति और संबंधित कानूनी प्रावधानों की व्याख्या का मुद्दा आगे की सुनवाई में तय होगा।










