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छत्तीसगढ़ में कोर्ट का बड़ा फैसला: सास की याचिका पर बहू को राहत, कोर्ट ने कहा, “रेप की शिकायत करने वाली युवती को नहीं माना जा सकता अपराधी”

बिलासपुर जिला न्यायालय ने ब्लैकमेलिंग और धमकी का मामला दर्ज कराने की याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि रेप की शिकायत करने वाली महिला को केवल इस आधार पर अपराधी नहीं माना जा सकता।

July 10, 2026 3:47 AM
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Bilaspur court News छत्तीसगढ़ जिला न्यायालय ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी महिला द्वारा पहले दर्ज कराई गई रेप की शिकायत को उसके खिलाफ आपराधिक व्यवहार का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने इसी दलील के साथ युवती को राहत दे दी। कोर्ट ने बहू पर ब्लैकमेलिंग, धमकी और तोड़फोड़ का मामला दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

दरअसल यह पूरा मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का है, जहां लव मैरिज के बाद परिवार में विवाद शुरू हो गया था। संजय रात्रे की मां पुष्पा देवी रात्रे ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रीति सूर्यवंशी नाम की युवती ने उनके बेटे को झूठे प्रेमजाल में फंसाया और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उनका यह भी आरोप था कि युवती ब्लैकमेल करती है और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी हरकतें कर रही है। इसी आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान युवती की ओर से अधिवक्ता समीर शुक्ला ने अदालत को बताया कि प्रीति और संजय ने जुलाई 2025 में प्रेम विवाह किया था। हालांकि शादी के करीब एक महीने बाद संजय लापता हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि संजय का परिवार इस शादी से खुश नहीं था, जिसके चलते दोनों के बीच विवाद की स्थिति बनी।

मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश लवकेश प्रताप सिंह बघेल की अदालत में हुई। अदालत ने कहा कि सिर्फ डायल-112 पर कॉल करना किसी अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी महिला द्वारा पहले दर्ज कराई गई रेप की शिकायत को उसके खिलाफ आपराधिक आचरण नहीं माना जा सकता।

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने ट्रायल कोर्ट के 1 दिसंबर 2025 के आदेश को सही ठहराया और पुष्पा देवी रात्रे की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही मामले से संबंधित रिकॉर्ड वापस ट्रायल कोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए गए।

 

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