बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अप्राकृतिक कृत्य और दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक गंभीर मामले में आरोपी पति, सास और देवर को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने FIR और लंबित ट्रायल को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामले की सुनवाई आगे बढ़ चुकी है, इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
ट्रायल अंतिम चरण की ओर
सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में कुल 13 गवाहों में से 5 के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। ऐसे में ट्रायल प्रक्रिया जारी है और इसे बीच में रोकना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
महिला ने लगाए थे गंभीर आरोप
आपको बता दें कि पीड़िता ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। साथ ही पति पर उसकी इच्छा के विरुद्ध अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया था। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच के बाद आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया था।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने कहा कि अप्राकृतिक कृत्य और दहेज प्रताड़ना जैसे आरोप गंभीर एवं संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड और ट्रायल की प्रगति को देखते हुए FIR या न्यायिक प्रक्रिया को इस चरण में रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता।अब इस मामले की सुनवाई निचली अदालत में पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।










