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Bilaspur High Court: आधार कार्ड ही उम्र का अंतिम प्रमाण नहीं, मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला, तीन सवारी होने मात्र से नहीं घटेगा मुआवजा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में आधार कार्ड ही उम्र का अंतिम प्रमाण नहीं है। मेडिकल रिकॉर्ड समेत सभी साक्ष्यों के आधार पर आयु तय होगी और तीन सवारी होने मात्र से मुआवजा नहीं घटाया जा सकता।

July 19, 2026 2:49 PM
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Chhattisgarh Legal News। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक्सीडेंट के मुआवजा मामले में अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा (Motor Accident Claim) मामलों में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल आधार कार्ड में दर्ज उम्र को अंतिम और अकाट्य प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि पीड़ित की आयु निर्धारित करते समय ट्रिब्यूनल को दिव्यांगता प्रमाणपत्र, चिकित्सकीय अभिलेख, उपचार संबंधी दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना होगा।

न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने तीन अपीलों की सुनवाई करते हुए घायल और मृतकों के आश्रितों को दिए गए मुआवजे में वृद्धि की। वहीं, वाहन मालिक की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराने की मांग की गई थी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 19 अप्रैल 2019 की रात रायपुर जिले के आरंग थाना क्षेत्र का है। प्रभु बैंड पार्टी की एक टाटा सूमो ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। हादसे में पंचराम भुंजिया की मौके पर मौत हो गई, जबकि बिसानाथ भुंजिया ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। वहीं तीसरे घायल रंजीत भुंजिया का इलाज के दौरान एक पैर काटना पड़ा और वह 70 प्रतिशत दिव्यांग हो गया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), महासमुंद ने 2 नवंबर 2021 को तीनों मामलों में अलग-अलग मुआवजा निर्धारित किया था।

आधार कार्ड अकेला नहीं हो सकता उम्र का प्रमाण

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि रंजीत भुंजिया की आयु क्लेम आवेदन में 58 वर्ष और मेडिकल रिकॉर्ड में 60 वर्ष दर्ज थी, लेकिन ट्रिब्यूनल ने केवल आधार कार्ड के आधार पर उसकी उम्र 68 वर्ष मान ली थी। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘सरोज बनाम इफ्को टोकियो (2024)’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आधार कार्ड अकेले उम्र का निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकता।अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रंजीत भुंजिया की आयु 61 से 65 वर्ष के बीच मानते हुए मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया।

तीन सवारी होना लापरवाही का पर्याप्त आधार नहीं

वाहन मालिक ने अदालत में तर्क दिया कि मोटरसाइकिल पर तीन लोग सवार थे, इसलिए मृतक और घायल भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार हैं।हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन होने मात्र से योगदानात्मक (Contributory) लापरवाही सिद्ध नहीं होती।अदालत ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि दुर्घटना का कारण या उसकी गंभीरता तीन लोगों के सवार होने से बढ़ी, तब तक मुआवजे में कटौती नहीं की जा सकती।

बीमा कंपनी पर नहीं बना दायित्व

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा प्रीमियम जमा होने मात्र से बीमा कवरेज शुरू नहीं हो जाता। बीमा अनुबंध उसी तारीख और समय से प्रभावी माना जाएगा, जो पॉलिसी में दर्ज है।चूंकि यह दुर्घटना बीमा पॉलिसी प्रभावी होने से पहले हुई थी, इसलिए बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

60 दिन में जमा करनी होगी बढ़ी हुई राशि

हाईकोर्ट ने वाहन चालक गोपी साहनी और वाहन मालिक गोविंद साहनी को निर्देश दिया कि वे बढ़ी हुई मुआवजा राशि 9 फरवरी 2022 से भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 60 दिनों के भीतर संबंधित क्लेम ट्रिब्यूनल में जमा करें।साथ ही ट्रिब्यूनल को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार मुआवजा राशि का वितरण और आवश्यक राशि को एफडी (Fixed Deposit) में निवेश कराने के निर्देश भी दिए गए।

 

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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