बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वन विभाग में तबादले और पदस्थापना को लेकर अहम फैसला सुनाया है। जूनियर की पोस्टिंग को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो आदेश को रद्द कर दिया है। मामला छत्तीसगढ़ के वन विभाग से जुड़ा है। नारायणपुर वन मंडल में पदस्थ वरिष्ठ वन कर्मचारी नागेश कुमार समरथ का तबादला कर उनके स्थान पर कनिष्ठ कर्मचारी को पदस्थ करने के आदेश को कोर्ट ने मनमाना मानते हुए रद्द कर दिया। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने 12 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में कहा कि वरिष्ठ कर्मचारी को हटाने के पीछे विभाग ने कोई ठोस प्रशासनिक आवश्यकता नहीं बताई। कोर्ट ने दोनों आदेश निरस्त करते हुए राज्य शासन को कानून के अनुसार नया आदेश जारी करने की छूट दी है।
वरिष्ठ को हटाया, उसी पद पर कनिष्ठ को बैठाया
मामला नारायणपुर वन मंडल के पश्चिम सोनपुर वन परिक्षेत्र के कंडाड़ी क्षेत्र में पदस्थापना से जुड़ा है। याचिकाकर्ता नागेश कुमार समरथ की वर्ष 2006 में वनरक्षक के पद पर नियुक्ति हुई थी। वर्ष 2014 में पदोन्नति के बाद उन्हें 12 मार्च 2025 को उप वन क्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नत किया गया।
इसके बाद 19 जून 2026 को उन्हें पश्चिम सोनपुर वन परिक्षेत्र के कंडाड़ी में क्षेत्र सहायक के पद पर पदस्थ किया गया। नागेश कुमार समरथ ने वहां कार्यभार संभालकर काम भी शुरू कर दिया था।
लेकिन कुछ ही समय बाद विभाग ने 10 जुलाई 2026 को उन्हें पूर्वी सोनपुर क्षेत्र में क्षेत्र सहायक के पद पर स्थानांतरित कर दिया। इसी दिन कनिष्ठ कर्मचारी वनपाल राजूराम पोत्ताई को कंडाड़ी में उसी पद पर पदस्थ करने का आदेश जारी कर दिया गया।
तबादले से पहले ही कनिष्ठ कर्मचारी की पदस्थापना का आदेश!
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि उनके तबादले की जानकारी दिए जाने से पहले ही कनिष्ठ कर्मचारी को कंडाड़ी में पदस्थ करने का आदेश जारी कर दिया गया था। इससे यह सवाल उठा कि क्या वरिष्ठ कर्मचारी को हटाकर कनिष्ठ कर्मचारी को उसी स्थान पर समायोजित करने के उद्देश्य से कार्रवाई की गई थी।
याचिकाकर्ता ने तबादले और नई पदस्थापना के आदेशों को चुनौती देते हुए उन्हें निरस्त करने की मांग की।दूसरी ओर, राज्य शासन की ओर से तबादले को प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर उचित ठहराया गया।
हाई कोर्ट ने आदेशों के क्रम पर उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दोनों आदेशों के क्रम और विभाग की ओर से दिए गए कारणों पर विचार किया। कोर्ट ने पाया कि वरिष्ठ कर्मचारी का तबादला करने और उसी दिन कनिष्ठ कर्मचारी को उसके स्थान पर पदस्थ करने की कार्रवाई से कनिष्ठ कर्मचारी को समायोजित करने की आशंका को बल मिलता है।
विभाग की ओर से वरिष्ठ कर्मचारी को हटाने के लिए कोई विशिष्ट और ठोस प्रशासनिक आवश्यकता भी नहीं बताई गई। कोर्ट ने इस कार्रवाई को राज्य शासन की 14 जुलाई 2014 की तबादला नीति के विपरीत माना।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने नागेश कुमार समरथ के तबादले और राजूराम पोत्ताई की पदस्थापना से संबंधित दोनों आदेश रद्द कर दिए।
शासन नए सिरे से जारी कर सकता है आदेश
हाई कोर्ट ने दोनों आदेश निरस्त करने के साथ राज्य शासन को कानून के अनुसार नया आदेश जारी करने की छूट भी दी है। इसका मतलब है कि विभाग नियमानुसार और उचित प्रशासनिक आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकता है।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नारायणपुर वन मंडल में वरिष्ठ वन कर्मचारी नागेश कुमार समरथ का तबादला और उनके स्थान पर कनिष्ठ कर्मचारी राजूराम पोत्ताई की पदस्थापना के आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ कर्मचारी को हटाने के लिए ठोस प्रशासनिक कारण नहीं बताया गया था।










