न्यूज हेडलाइन टॉप न्यूज छत्तीसगढ़ ब्यूरोक्रेट वेब स्टोरी/शॉर्टस क्राइम शिक्षक/कर्मचारी देश/राज्य मौसम मनोरंजन खेल/खिलाड़ी राशिफल/धर्म सेहत ऑटोमोबाइल/मोबाइल बिजनेस नौकरी/सरकारी योजनाएं

---Advertisement---

Bilaspur High Court: मातृत्व अवकाश मांगा तो मिला टर्मिनेशन नोटिस, हाई कोर्ट ने महिला डॉक्टर को दिया बड़ा राहत

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संविदा महिला डॉक्टर को 180 दिन का मातृत्व अवकाश और नियमानुसार लाभ देने का आदेश दिया। सेवा समाप्ति नोटिस और एकल पीठ का आदेश निरस्त।

October 16, 2026 5:42 AM
Highcourt News
---Advertisement---11

बिलासपुर। मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया, लेकिन छुट्टी देने के बजाय सेवा समाप्ति का नोटिस थमा दिया गया। अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोरबा के शासकीय मेडिकल कॉलेज में संविदा पर कार्यरत महिला डॉक्टर डॉ. निकिता श्रीवास्तव के मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उनकी सेवा समाप्ति का नोटिस और एकल पीठ का पूर्व आदेश निरस्त करते हुए 180 दिन के मातृत्व अवकाश सहित नियमानुसार सभी लाभ देने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने 14 अक्टूबर को दिए फैसले में स्पष्ट किया कि आवेदन के समय संविदा सेवा में कार्यरत महिला को केवल नियमित डॉक्टर की नियुक्ति का आधार बनाकर मातृत्व अवकाश के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

छुट्टी के आवेदन के बाद थमा दिया गया सेवा समाप्ति का नोटिस

डॉ. निकिता श्रीवास्तव की नियुक्ति 16 नवंबर 2022 को स्वर्गीय बिसाहू दास महंत स्मृति शासकीय मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में संविदा सहायक प्राध्यापक के रूप में हुई थी। इसी दौरान नियमित डॉक्टर डॉ. शीला वर्मा ने 25 जून 2026 को पदभार ग्रहण कर लिया। इसके बावजूद डॉ. निकिता संविदा पर काम करती रहीं।

उन्होंने 31 जुलाई 2026 को आवेदन देकर एक अगस्त 2026 से 28 जनवरी 2027 तक 180 दिन के सवैतनिक मातृत्व अवकाश की मांग की। विभागाध्यक्ष ने तीन अगस्त को आवेदन की अनुशंसा भी कर दी, लेकिन छह अगस्त को कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें एक महीने का सेवा समाप्ति नोटिस जारी कर दिया।इसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। हाई कोर्ट ने अब सेवा समाप्ति के नोटिस को निरस्त करते हुए महिला डॉक्टर को मातृत्व अवकाश का लाभ देने का आदेश दिया है।

सरकार ने क्या दी दलील?

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि नियमित डॉक्टर के पदभार ग्रहण करने के बाद संविदा नियुक्ति की शर्तों के अनुसार डॉ. निकिता की सेवा समाप्त हो गई थी।

वहीं, डॉक्टर की ओर से पेश अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के डॉ. कविता यादव बनाम सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय मामले का हवाला दिया। उनका तर्क था कि संविदा सेवा की अवधि समाप्त होने का आधार लेकर मातृत्व लाभ के अधिकार से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने क्यों दिया 180 दिन के मातृत्व अवकाश का आदेश?

हाई कोर्ट ने पाया कि डॉ. निकिता ने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन उस समय किया था, जब वह सेवा में थीं। पीठ ने इसी तथ्य को महत्वपूर्ण मानते हुए उन्हें आवेदन की तारीख से 180 दिन का मातृत्व अवकाश और मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत नियमानुसार सभी लाभ देने का निर्देश दिया।कोर्ट ने आठ सितंबर 2026 के एकल पीठ के आदेश और छह अगस्त 2026 के सेवा समाप्ति नोटिस को निरस्त कर दिया।

संविदा महिला कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?

यह मामला मातृत्व अवकाश के अधिकार और संविदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों से जुड़ा है। हाई कोर्ट के फैसले में इस बात पर जोर दिया गया कि जब महिला कर्मचारी ने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया, तब वह सेवा में कार्यरत थी। ऐसे में केवल नियमित डॉक्टर की नियुक्ति को आधार बनाकर मातृत्व लाभ से इनकार नहीं किया जा सकता।डॉ. निकिता श्रीवास्तव को 180 दिन के मातृत्व अवकाश और नियमानुसार लाभ देने का निर्देश इस मामले का प्रमुख निष्कर्ष है।

 

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories

Leave a Comment