CG Pensioners News: छत्तीसगढ़ में शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनरों को बड़ा झटका लगा है। उच्च शिक्षा विभाग ने पुराने पेंशन-ग्रेच्युटी आदेश और 350 लाख की दूसरी किश्त का आदेश निरस्त किया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने पेंशनरों से जुड़ा बेहद ही अहम निर्णय लिया है। सरकार ने उन पेंशनरों की पेंशन व गेच्युटी को बंद करने का फैसला लिया है, जो शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों से रिटायर हुए थे। सरकार ने सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों पर अहम प्रशासनिक फैसला लेते हुए इन संस्थानों के पेंशनरों को वेतनमान के आधार पर मिल रहे पेंशन और ग्रेच्युटी से संबंधित पुराने प्रावधान को तत्काल प्रभाव से खत्म करने का आदेश दिया है। सरकार ने पेंशन भुगतान के लिए जारी 350 लाख रुपये की दूसरी किश्त का आदेश भी निरस्त कर दिया गया है।
जानिये क्या था 2010 में सरकार का आदेश
दरअसल उच्च शिक्षा विभाग ने 12 अक्टूबर 2010 को एक आदेश जारी किया था। उस आदेश में ये उल्लेखित था कि शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनरों को चौथे वेतनमान के आधार पर ग्रेच्युटी तथा पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ दिया जायेगा। तब से लेकर अब तक यानि करीब 16 साल से ये आदेश चला आ रहा था। लेकिन, अब विभाग के ताजा निर्णय से इस व्यवस्था के तहत मिलने वाले लाभों को आगे जारी रखने पर रोक लग गई है।
कैबिनेट के फैसले के बाद बदली व्यवस्था
उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से जारी आदेश में बताया गया है कि 22 जुलाई 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस विषय पर विचार किया गया था। कैबिनेट ने नियमों में स्पष्ट प्रावधान नहीं होने और इसे लोकहित में उचित नहीं मानते हुए प्रस्ताव को अमान्य करने का निर्णय लिया।
इसके साथ ही नई दिल्ली स्थित उच्चतम न्यायालय में लंबित संबंधित प्रकरणों में सरकार की ओर से उचित कानूनी पैरवी किए जाने का परामर्श भी दिया गया था।इसी निर्णय के क्रम में 1 सितंबर 2026 को उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर पुरानी व्यवस्था के तहत मिलने वाले संबंधित लाभों को समाप्त कर दिया।
350 लाख रुपये की दूसरी किश्त भी रोकी
राज्य सरकार ने पेंशन व ग्रेच्युटी पर रोक का आदेश तत्काल प्रभाव से लगाने का फैसला लिया है, लिहाजा पेंशन की किस्त के लिए जो राशि जारी की गयी थी, उस पर भी रोक लगा दी गयी है। 8 सितंबर 2026 को जारी उस आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है, जिसमें अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनरों के लिए कुल 1400 लाख रुपये के प्रावधान में से दूसरी किश्त के रूप में 350 लाख रुपये जारी करने की स्वीकृति दी गई थी।विभाग ने स्पष्ट किया है कि मंत्रिपरिषद के निर्णय और 1 सितंबर के आदेश के बाद 8 सितंबर को जारी यह विमुक्ति आदेश भी निरस्त माना जाएगा।
प्राध्यापक संघ ने फैसले पर जताई नाराजगी
सरकार के इस निर्णय का छत्तीसगढ़ राज्य अनुदान प्राप्त महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ ने विरोध किया है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार शर्मा ने इसे आश्चर्यजनक और चिंताजनक निर्णय बताया।उन्होंने कहा कि करीब चार दशक से चली आ रही व्यवस्था को अचानक समाप्त किए जाने से सेवानिवृत्त शिक्षक मुश्किल स्थिति में पहुंच जाएंगे।
संघ का कहना है कि 90 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग शिक्षकों के सामने दैनिक जरूरतों और इलाज का खर्च उठाने की समस्या खड़ी हो सकती है।संघ ने यह भी कहा है कि इस फैसले का असर केवल सेवानिवृत्त शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
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