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CG Teacher Recruitment: 12,489 शिक्षकों की भर्ती विज्ञापन रद्द, छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती 2023 के आरक्षण रोस्टर पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, नियुक्तियों पर भी रहेगी शर्त

छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती के आरक्षण रोस्टर पर हाई कोर्ट का फैसला। 58 प्रतिशत आरक्षण, एसटी वर्ग के आरक्षित पदों और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।

October 14, 2026 7:06 PM
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती के आरक्षण रोस्टर को लेकर चल रहे विवाद में हाई कोर्ट के फैसले से सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता भर्ती प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं। मामला वर्ष 2023 में जारी भर्ती विज्ञापन में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण और पहले निरस्त की जा चुकी आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, अदालत ने विवादित रोस्टर को निरस्त करते हुए नियुक्तियों और पदोन्नतियों को सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन रखने की बात कही है।

58 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर उठा सवाल

यह पूरा विवाद स्कूल शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की ओर से 4 मई 2023 को जारी भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है। इस विज्ञापन के माध्यम से सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

कामेश्वर कुमार यादव, योगेंद्र कुमार शर्मा, परिमल कुमार भोई सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने भर्ती में लागू आरक्षण रोस्टर को चुनौती दी थी। इन याचिकाओं में डब्ल्यूपीएस क्रमांक 300/2024 को प्रमुख मामला बताया गया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ के समक्ष हुई।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि भर्ती में 58 प्रतिशत आरक्षण से जुड़ी उस व्यवस्था के आधार पर रोस्टर लागू किया गया, जिसे हाई कोर्ट की खंडपीठ पहले ही असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर चुकी थी।

एसटी वर्ग के लिए आरक्षित पदों के आंकड़ों पर विवाद

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना आफरीन अली और अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि ई-कैडर में शिक्षक के कुल 1,113 पदों में से 698 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे। यह कुल पदों का लगभग 62.71 प्रतिशत बताया गया।

इसी तरह टी-कैडर में शिक्षक के 4,659 पदों में से 3,105 पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित होने का दावा किया गया, जो करीब 66.64 प्रतिशत है। सहायक शिक्षक के पदों में भी आरक्षण का अनुपात 56.62 प्रतिशत से 68.42 प्रतिशत तक होने की बात याचिकाकर्ताओं ने कही।

उनका तर्क था कि आरक्षण का यह अनुपात संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है। उन्होंने विवादित रोस्टर को निरस्त कर वैध आरक्षण नियमों के अनुसार दस्तावेज सत्यापन, काउंसलिंग और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की।

2012 की अधिसूचना से कैसे जुड़ा पूरा मामला?

विवाद की जड़ 29 नवंबर 2012 को जारी अधिसूचना है, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ में कुल आरक्षण का अनुपात बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया गया था। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 19 सितंबर 2022 को इस आरक्षण व्यवस्था को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जब मूल अधिसूचना ही निरस्त हो चुकी थी, तब उसके आधार पर तैयार रोस्टर को नई भर्ती में लागू करना उचित नहीं था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बैकलॉग पदों को शामिल करने के नाम पर अन्य वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित अवसरों को किस आधार पर प्रभावित किया जा सकता है।

शासन ने बैकलॉग पदों और क्षेत्रीय परिस्थितियों का दिया हवाला

राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता आनंद दादरिया ने भर्ती प्रक्रिया के पक्ष में दलीलें रखीं। शासन के अनुसार, विज्ञापन में नए पदों के अलावा वर्ष 2019 की भर्ती के लगभग 3,190 बैकलॉग पद भी शामिल किए गए थे।

शासन ने बताया कि सहायक शिक्षक और शिक्षक के पदों की प्रकृति अलग-अलग होने के कारण जिला एवं संभाग स्तर पर रोस्टर लागू किया गया। बस्तर और सरगुजा संभाग की स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया था।

राज्य शासन की ओर से यह भी बताया गया कि वर्ष 2022 के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस संबंध में लंबित विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) में 1 मई 2023 को पारित अंतरिम आदेश के आधार पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने का तर्क दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक नियुक्तियों पर क्या असर पड़ेगा?

याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत विवरण के मुताबिक, विवादित आरक्षण रोस्टर को निरस्त करने के साथ वर्तमान और भविष्य की नियुक्तियों तथा पदोन्नतियों को सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन रखने की बात कही गई है।

इसका अर्थ यह है कि संबंधित नियुक्तियों और पदोन्नतियों पर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का प्रभाव पड़ सकता है। केवल नियुक्ति या पदोन्नति मिल जाने से ऐसा अंतिम अधिकार सुनिश्चित नहीं माना जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से अप्रभावित रहे।

यदि अंतिम फैसले के बाद रोस्टर, चयन सूची या नियुक्तियों में बदलाव की आवश्यकता सामने आती है, तो राज्य शासन को कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी पड़ सकती है।

छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती में एसटी वर्ग के लिए आरक्षण रोस्टर को लेकर हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। विवाद वर्ष 2012 की उस आरक्षण अधिसूचना से जुड़ा है, जिसे हाई कोर्ट ने 2022 में निरस्त कर दिया था। याचिकाकर्ताओं के विवरण के अनुसार, अदालत ने विवादित रोस्टर पर फैसला सुनाते हुए नियुक्तियों और पदोन्नतियों को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रखने की बात कही है। इससे भर्ती प्रक्रिया और संबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों पर आगे न्यायिक फैसले का असर पड़ सकता है।

 

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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