रायपुर। चार साल से जो अधिकारी बनकर काम कर रहे थे, अब वो फिर से कर्मचारी बन जायेंगे। छत्तीसगढ़ के राज्य कर विभाग में वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनने के लिए वर्ष 2022 में हुई सीमित प्रतियोगिता परीक्षा अब चार साल बाद निरस्त कर दी गई है। दरअसल इस परीक्षा को लेकर शिकायत हुई थी। जिसके बाद परीक्षा की जांच शुरू हुई। विभागीय जांच में परीक्षा से लेकर चयन तक ऐसी कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिनके चलते पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और परिणाम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
जांच में चयनित अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं में एक जैसे जवाब, परीक्षा केंद्र पर उपस्थिति रजिस्टर का अभाव, समेकित अंक सूची तैयार नहीं करने और उत्तरपुस्तिकाओं की कोडिंग नहीं होने जैसी गड़बड़ियां मिलीं।इतना ही नहीं, कुछ अभ्यर्थियों के दोबारा मूल्यांकन में अंक बढ़ने के बाद चयन होने की बात भी जांच में सामने आई।
इन खामियों के बाद राज्य कर आयुक्त कार्यालय ने 11 सितंबर 2026 को 26 जून 2022 की परीक्षा और उसके आधार पर हुई पूरी चयन प्रक्रिया को शून्य घोषित करते हुए रद्द कर दिया। इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ा है, जो इसी परीक्षा के आधार पर वाणिज्यिक कर निरीक्षक बनाए गए थे। अब उन्हें अपने मूल पद और मूल पदस्थापना पर वापस लौटना होगा।
शिकायत के बाद बनी थी जांच समिति
वर्ष 2022 में लिपिक वर्ग के कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर नियुक्त करने के लिए 26 जून को सीमित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के आधार पर एक जुलाई 2022 को चयनित कर्मचारियों की नियुक्ति की गई।
बाद में परीक्षा और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद विभाग ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की। समिति ने परीक्षा से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की और 3 जुलाई 2026 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपी।रिपोर्ट में परीक्षा आयोजित करने, उत्तरपुस्तिकाओं की जांच, पुनर्मूल्यांकन और अंतिम चयन तक कई स्तरों पर प्रक्रियागत खामियां सामने आने की बात कही गई।
आरक्षण रोस्टर के अनुसार पदों का बंटवारा नहीं
जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा से पहले आरक्षण रोस्टर के अनुसार अलग-अलग वर्गों के लिए पदों का स्पष्ट बंटवारा नहीं किया गया था। विभाग के आदेश में माना गया कि इससे आरक्षण संबंधी नियमों के पालन और पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर देने की व्यवस्था प्रभावित हुई।
परीक्षा में कौन शामिल हुआ, इसका रिकॉर्ड तक नहीं
जांच समिति को परीक्षा केंद्र पर परीक्षार्थियों की उपस्थिति का रजिस्टर नहीं मिला। यानी परीक्षा में वास्तव में कौन-कौन कर्मचारी शामिल हुआ था, इसका मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।इसके अलावा परीक्षा का समेकित परिणाम और अंक सूची भी तैयार अथवा सुरक्षित नहीं रखी गई थी। इससे सभी अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों की तुलना कर निष्पक्ष मेरिट निर्धारित करने में गंभीर दिक्कत पैदा हुई।
चयनित अभ्यर्थियों की कापियों में एक जैसे जवाब
जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा चयनित अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं से जुड़ा रहा। रिपोर्ट के मुताबिक चयनित अभ्यर्थियों में से अधिकांश की उत्तरपुस्तिकाओं में एक जैसे जवाब पाए गए।
इन जवाबों के एक जैसा होने का कोई संतोषजनक कारण रिकॉर्ड में नहीं मिला। विभाग ने माना कि उत्तरपुस्तिकाओं में इस तरह की समानता परीक्षा की निष्पक्षता और घोषित परिणाम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उत्तरपुस्तिकाओं पर कोडिंग तक नहीं की गई
परीक्षा में उत्तरपुस्तिकाओं की पहचान छिपाने के लिए कोडिंग की व्यवस्था भी नहीं की गई थी। सामान्य तौर पर कोडिंग का उद्देश्य मूल्यांकनकर्ता से अभ्यर्थी की पहचान छिपाना होता है, ताकि मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से हो सके।इस परीक्षा में ऐसी व्यवस्था नहीं होने से मूल्यांकन की गोपनीयता और निष्पक्षता प्रभावित होने की बात जांच में सामने आई।
दोबारा जांच में बढ़े अंक, फिर बदली मेरिट
जांच में कुछ अभ्यर्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन में अंक बढ़ने की बात भी सामने आई। विभागीय आदेश के मुताबिक प्रथम दृष्टया उपलब्ध रिकॉर्ड से संकेत मिला कि कुछ चयनित अभ्यर्थियों का चयन पुनर्मूल्यांकन के बाद बढ़े अंकों के आधार पर हुआ।चयन सूची जारी होने से पहले पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में चयन समिति के अध्यक्ष, सदस्य और परीक्षा नियंत्रक के शामिल होने का भी उल्लेख जांच में किया गया। विभाग ने इससे मूल्यांकन की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठने की बात कही।
उत्तरपुस्तिकाओं की खरीद और इस्तेमाल का हिसाब भी नहीं मिला
जांच समिति ने वर्ष 2021 और 2022 में हुई परीक्षाओं से जुड़ी उत्तरपुस्तिकाओं के रिकॉर्ड की भी जांच की। इसमें खरीदी गई उत्तरपुस्तिकाओं की संख्या और इस्तेमाल अथवा बची हुई उत्तरपुस्तिकाओं की संख्या में अंतर पाया गया।रिकॉर्ड में यह स्पष्ट रूप से मेल नहीं खा रहा था कि खरीदी गई कुल उत्तरपुस्तिकाओं में से कितनी परीक्षा में इस्तेमाल हुईं और कितनी बचीं।
सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों पर कार्रवाई से नहीं सुलझता मामला
विभाग ने यह विकल्प भी देखा कि यदि गड़बड़ी का लाभ सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों को मिला हो तो केवल उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जाए। लेकिन परीक्षा के मूल रिकॉर्ड अधूरे होने के कारण यह निर्धारित करना मुश्किल था कि कौन प्रभावित हुआ और कौन नहीं।सभी उत्तरपुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कर नई मेरिट सूची तैयार करने के विकल्प पर भी विचार हुआ। लेकिन समेकित अंक सूची, उपस्थिति रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों के अभाव में नई मेरिट को भी विश्वसनीय आधार पर तैयार करना संभव नहीं माना गया।
चार साल बाद पूरी परीक्षा ही निरस्त
जांच में मिली खामियां परीक्षा के किसी एक चरण तक सीमित नहीं थीं। आरक्षण के अनुसार पदों के निर्धारण से लेकर परीक्षा संचालन, उपस्थिति रिकॉर्ड, उत्तरपुस्तिकाओं की गोपनीयता, मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन और अंतिम चयन तक अलग-अलग स्तरों पर अनियमितताएं सामने आईं।विभाग ने माना कि इन परिस्थितियों में यह भरोसे के साथ तय करना संभव नहीं है कि 2022 में घोषित परिणाम अभ्यर्थियों की वास्तविक और निष्पक्ष मेरिट को दर्शाता है। इसी आधार पर पूरी परीक्षा और उसके आधार पर हुआ चयन निरस्त कर दिया गया।
निरीक्षक बने कर्मचारियों को अब मूल पद पर लौटना होगा
राज्य कर विभाग ने 26 जून 2022 को हुई सीमित प्रतियोगिता परीक्षा को निरस्त करने के साथ ही 1 जुलाई 2022 के चयन आदेश को भी रद्द कर दिया है।इस परीक्षा के आधार पर वाणिज्यिक कर निरीक्षक बने सभी प्रभावित कर्मचारी अब अपने मूल पद और मूल पदस्थापना पर वापस जाएंगे, जहां वे निरीक्षक बनने से पहले कार्यरत थे। विभाग का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का भी उल्लेख
विभाग ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता तथा सरकारी रोजगार में समान अवसर के सिद्धांतों का भी उल्लेख किया है।विभाग के अनुसार परीक्षा और चयन प्रक्रिया में सामने आई खामियों के कारण निष्पक्ष और पारदर्शी चयन की स्थिति कायम नहीं रह सकी। इसी आधार पर चार साल पुरानी परीक्षा और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को निरस्त करने का फैसला लिया गया।










