Chhattisgarh Highcourt News। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जाति प्रमाण-पत्र के लिए आवेदकों को वर्षों तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। अंबिकापुर के दो छात्रों की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित तहसीलदार और सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्थायी जाति प्रमाण-पत्र के लंबित आवेदनों पर 30 दिनों के भीतर नियमानुसार निर्णय लिया जाए।
अस्थायी प्रमाण-पत्र के बावजूद नहीं मिला स्थायी प्रमाण-पत्र
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने यह आदेश मोहसिन अली और सिमरन बानो की याचिकाओं का निराकरण करते हुए दिया। दोनों ने ‘दर्जी’ (मुस्लिम) जाति का स्थायी जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मोहसिन अली ने बताया कि वर्ष 2022 में उन्हें अस्थायी जाति प्रमाण-पत्र जारी किया गया था, लेकिन स्थायी प्रमाण-पत्र के लिए किया गया आवेदन अब तक लंबित है। इसके चलते उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों को मिलने वाले शैक्षणिक और वैधानिक लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।
वहीं सिमरन बानो ने सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि उनके पास भी वर्ष 2022 का अस्थायी जाति प्रमाण-पत्र है, जबकि उनके पिता का स्थायी जाति प्रमाण-पत्र वर्ष 1997 से बना हुआ है। इसके बावजूद उनका स्थायी प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया गया, जिससे उनकी पढ़ाई और सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा है।
आवेदकों को सुनवाई का पूरा अवसर देने के निर्देश
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से भी आवेदन के शीघ्र निराकरण पर सहमति जताई गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवेदन पर निर्णय लेने से पहले आवेदकों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए। यदि किसी अतिरिक्त दस्तावेज या जानकारी की आवश्यकता हो तो उसकी सूचना समय पर आवेदकों को दी जाए, ताकि वे आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत कर सकें।
कारणयुक्त और तर्कसंगत आदेश पारित करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देशित किया कि सक्षम प्राधिकारी मामले के सभी तथ्यों और गुण-दोषों पर विचार करते हुए तर्कसंगत एवं कारणयुक्त आदेश पारित करेगा। साथ ही यह पूरी प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में जाति प्रमाण पत्र को लेकर काफी शिकायतें आती रहती है। कहीं अधिकारियों की अनुपलब्धता, तो कहीं नियमों की पेचिदगियों की वजह से प्रमाण पत्र अटके हुए हैं। कई बार जाति प्रमाण पत्र बनाने को लेकर स्पष्ट निर्देश के बावजूद काम सुचारू रूप से नहीं हो पाता है। ऐसे में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब उम्मीद है कि जल्द ही शासन स्तर पर इस संबंध में कोई निर्णय लिया जायेगा।










