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High Court News :”आपसी सहमति से शारीरिक संबंध, रेप नहीं” हाईकोर्ट की दुष्कर्म मामले में कड़ी टिप्पणी, ‘बालिग महिला परिणाम जानकर संबंध बनाती है तो उसे सहमति माना जाएगा’

June 30, 2026 3:52 AM
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने दुष्कर्म के एक मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि यदि कोई बालिग महिला अपने कृत्य के परिणामों को समझते हुए शारीरिक संबंध बनाती है, तो उसे सहमति (Consent) माना जाएगा। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने पीड़िता द्वारा दायर अक्विटल अपील (Acquittal Appeal) को खारिज कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की खंडपीठ ने सुनाया।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को पहले ही कर दिया था बरी

ये पूरा मामला सरगुजा जिले के अंबिकापुर के मणिपुर चौकी क्षेत्र का है। शिकायत के अनुसार, 15 जून 2018 की रात 40 वर्षीय महिला शौचालय से लौट रही थी। आरोप था कि इसी दौरान आरोपी रामेश्वर दास ने जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ मारपीट की और दुष्कर्म किया।मामले की सुनवाई के बाद सरगुजा के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 28 जनवरी 2022 को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए पीड़िता ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

साक्ष्यों से सहमति के संकेत मिले

हाई कोर्ट ने पीड़िता के न्यायालय में दिए गए बयान, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि घटना के दौरान दोनों के बीच बातचीत हुई थी और उपलब्ध परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे।खंडपीठ ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2013 के कैनी राजन बनाम केरल राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि “सहमति केवल मौन आत्मसमर्पण नहीं होती, बल्कि यह सोच-समझकर लिया गया स्वतंत्र निर्णय होती है।”

मेडिकल रिपोर्ट से भी नहीं हुई दुष्कर्म की पुष्टि

अदालत ने यह भी कहा कि 40 वर्षीय पीड़िता, जो तीन बच्चों की मां है, अपने कृत्य के परिणामों और सामाजिक प्रभाव से पूरी तरह परिचित थी।सुनवाई के दौरान प्रस्तुत डॉ. रोजलिन आर. एक्का की मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई। साथ ही रिपोर्ट में दर्ज चोटें भी कथित घटना के समय और परिस्थितियों से मेल नहीं खाती थीं।

हाई कोर्ट ने अपील की खारिज

दोनों पक्षों की दलीलें और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद हाई कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने तथ्यों और साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया था। अदालत को फैसले में कोई कानूनी त्रुटि या गंभीर विसंगति नहीं मिली।इसी आधार पर खंडपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और पीड़िता की अक्विटल अपील प्रारंभिक सुनवाई में ही खारिज कर दी गई।

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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