बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में संविदा कर्मचारियों की उम्र सीमा को लेकर हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है। दायर हुई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने का लाभ पहले से जारी भर्ती प्रक्रिया में भी मिल सकता है, बशर्ते भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई हो। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस संबंध में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो संविदा क्षेत्र समन्वयकों की उम्मीदवारी पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने रामफल केवट और स्वप्निल जायसवाल की याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को 16 सितंबर 2026 के नए परिपत्र के आधार पर 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने को कहा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोनों अभ्यर्थी भर्ती की अन्य शर्तें पूरी करते हैं, तो उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
27 मार्च 2026 को जारी हुआ था भर्ती विज्ञापन
दरअसल याचिकाकर्ता रामफल केवट जनपद पंचायत सारंगढ़ और स्वप्निल जायसवाल जनपद पंचायत बेमेतरा में संविदा क्षेत्र समन्वयक के पद पर कार्यरत हैं। दोनों ने ब्लॉक परियोजना प्रबंधक के पद पर भर्ती के लिए आवेदन किया था। इस भर्ती के लिए 27 मार्च 2026 को विज्ञापन जारी किया गया था।भर्ती में एक जनवरी 2026 की स्थिति के आधार पर अभ्यर्थियों की आयु की गणना की गई। उस समय रामफल केवट की उम्र 42 वर्ष और स्वप्निल जायसवाल की उम्र 38 वर्ष थी। पुरानी आयु सीमा के आधार पर रामफल को निर्धारित अधिकतम उम्र से अधिक होने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
पहले 38 वर्ष निर्धारित थी अधिकतम आयु सीमा
याचिकाकर्ताओं की ओर से हाई कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने तीन अगस्त 2024 के परिपत्र के माध्यम से राज्य सरकार या उसके विभागों में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष निर्धारित की थी। इसी प्रावधान के आधार पर उनकी उम्मीदवारी प्रभावित हुई।
हालांकि, याचिका लंबित रहने के दौरान राज्य सरकार ने 16 सितंबर 2026 को नया परिपत्र जारी कर संविदा कर्मचारियों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 45 वर्ष कर दी। अभ्यर्थियों का तर्क था कि चूंकि भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए नई आयु सीमा का लाभ उन्हें भी दिया जाना चाहिए।
राज्य सरकार और जिला पंचायत ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और जिला पंचायत की ओर से याचिकाकर्ताओं की मांग का विरोध किया गया। शासन पक्ष का तर्क था कि नई आयु सीमा का लाभ 16 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा, जबकि संबंधित भर्ती प्रक्रिया 27 मार्च 2026 को ही शुरू हो चुकी थी। इसलिए नए परिपत्र को पहले से शुरू हुई भर्ती पर लागू नहीं किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने कहा- भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी पुरानी आयु सीमा के आधार पर खारिज की गई थी, लेकिन बाद में सरकार ने संविदा कर्मचारियों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 45 वर्ष कर दी।
कोर्ट ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि 27 मार्च 2026 को शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और शुरुआती चरण में है। ऐसे में नई आयु सीमा का लाभ याचिकाकर्ताओं को देना उचित होगा।
30 दिन में करना होगा उम्मीदवारी पर पुनर्विचार
हाई कोर्ट ने संबंधित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 16 सितंबर 2026 के परिपत्र और लागू आरक्षण व्यवस्था के अनुसार रामफल केवट तथा स्वप्निल जायसवाल की उम्मीदवारी पर 30 दिनों के भीतर नए सिरे से निर्णय लें।
कोर्ट ने कहा है कि यदि दोनों अभ्यर्थी भर्ती की अन्य निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं, तो उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए। इस फैसले से उन संविदा कर्मचारियों को भी राहत मिलने की संभावना है, जिनकी उम्मीदवारी भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले लागू आयु सीमा में बदलाव के कारण प्रभावित हुई है।










