छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नियम विरुद्ध तबादले को लेकर अहम निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, सक्ती सुधाकर बोदले के 1 सितंबर 2026 के तबादला आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट के समक्ष मुख्य मुद्दा यह है कि स्थानांतरण नीति में निर्धारित दो साल की अवधि पूरी होने से पहले किया गया तबादला किन परिस्थितियों में उचित माना जा सकता है।कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि उनकी सक्ती में पदस्थापना को दो साल पूरे नहीं हुए थे। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी।
बिलासपुर। तबादले को लेकर हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिया है।10 महीने के भीतर हुए दूसरी बार तबादले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, सक्ती के पद पर पदस्थ सुधाकर बोदले ने अपने तबादले को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके बाद सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तबादले पर अंतरिम रोक लगा दी है।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस बात को महत्वपूर्ण माना कि याचिकाकर्ता की सक्ती जिले में पदस्थापना को अभी दो साल पूरे नहीं हुए थे। लागू स्थानांतरण नीति में सामान्य परिस्थितियों में कर्मचारी को वर्तमान पदस्थापना स्थल पर दो साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले स्थानांतरित नहीं करने का प्रावधान है।मामले की सुनवाई जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमन तांबोली ने पक्ष रखा, जबकि शासन की ओर से उप शासकीय अधिवक्ता के.जी. यादव उपस्थित हुए।
पदोन्नति के बाद सक्ती में हुई थी पदस्थापना
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सुधाकर बोदले को 7 नवंबर 2025 के आदेश के जरिए जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया था। पदोन्नति के साथ ही उनकी पदस्थापना सक्ती जिले में की गई थी। उन्होंने सक्ती में पदभार ग्रहण कर काम शुरू किया।इसके करीब 10 महीने बाद 1 सितंबर 2026 को नया तबादला आदेश जारी किया गया। इसके तहत उन्हें जिला कार्यक्रम अधिकारी, सक्ती के पद से हटाकर उप संचालक, क्षेत्रीय महिला प्रशिक्षण संस्थान, सरगुजा के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया।
दो साल की अवधि पूरी होने से पहले तबादले को दी चुनौती
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में तबादला आदेश को चुनौती देते हुए लागू स्थानांतरण नीति के खंड 3.10 का हवाला दिया। उनका तर्क था कि सामान्य परिस्थितियों में किसी कर्मचारी को वर्तमान पदस्थापना स्थल पर दो साल की अवधि पूरी होने से पहले स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए।सुधाकर बोदले की सक्ती में पदस्थापना 7 नवंबर 2025 को हुई थी, जबकि तबादला आदेश 1 सितंबर 2026 को जारी कर दिया गया। इस तरह उन्हें सक्ती में करीब 10 महीने की पदस्थापना के बाद ही दूसरी जगह भेजने का आदेश दिया गया।
हाई कोर्ट ने तबादला आदेश के क्रियान्वयन पर लगाई रोक
मामले में पेश दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाकर्ता की सक्ती में पदस्थापना को दो साल पूरे होने से पहले ही तबादला आदेश जारी किया गया।कोर्ट ने इस आधार पर अंतरिम संरक्षण देना उचित माना और 1 सितंबर 2026 के तबादला आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। हाईकोर्ट की यह अंतरिम राहत फिलहाल याचिकाकर्ता सुधाकर बोदले के मामले तक सीमित है।
प्रतिवादियों को नोटिस, 29 अक्टूबर को अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। शासन की ओर से प्रतिवादी क्रमांक 1 से 3 की ओर से नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया।वहीं, प्रतिवादी क्रमांक 4 को सात दिनों के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। अंतरिम राहत से जुड़े आवेदन पर भी नोटिस जारी किया गया है।मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी। ऐसे में अब नोटिस के जवाब पर हर किसी की नजर है, जवाब क्या प्रस्तुत किया जाता है।










