रायपुर | छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी संभागीय संयुक्त संचालकों (JD) और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण पत्र जारी किया है। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह द्वारा 09 सितंबर 2026 को जारी इस आदेश के तहत राज्य के सभी शासकीय हाई स्कूलों एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों (Principals) के पदीय कार्यों और दायित्वों को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं।
प्राचार्यों के लिए हर दिन दो कालखंड (Periods) पढ़ाना अनिवार्य
नए और सख्त दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब विद्यालयों के प्राचार्यों को केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें शिक्षण कार्य में भी सक्रिय भागीदारी निभाना अनिवार्य कर दिया गया है। आदेश की कंडिका (2) में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित विद्यालय के प्राचार्य आवश्यकतानुसार कम से कम 02 कालखंड (Periods) अध्यापन प्रतिदिन करेंगे।
आदेश की अन्य मुख्य बातें:
• प्रशासनिक व वित्तीय कार्य: प्राचार्य अपने विद्यालय से संबंधित समस्त प्रशासनिक और वित्तीय दायित्वों का निर्वहन करेंगे।
• कमरों के उपयोग पर पाबंदी: विद्यालय भवन के ड्राइंग डिजाइन के अनुसार प्राचार्य कक्ष, लिपिक कक्ष या स्टाफ कक्ष के लिए निर्धारित कमरों में ही संबंधित अधिकारी/कर्मचारी बैठेंगे। इसके अलावा किसी भी स्थिति में अध्यापन कक्ष (Classrooms) का उपयोग प्राचार्य, लिपिक या स्टाफ के बैठने के लिए नहीं किया जाएगा।
• बड़े कक्षों का सदुपयोग: विद्यालयों में स्थित बड़े-बड़े कमरों का उपयोग प्राथमिकता के साथ छात्र-छात्राओं के अध्ययन-अध्यापन के लिए ही किया जाना सुनिश्चित किया जाए।

शासन ने सभी जेडी (JD) और डीईओ (DEO) को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने अधीन आने वाले सभी स्कूलों में इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। इस कदम से सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था और पठन-पाठन के स्तर में और अधिक सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।











व्याख्याता के लिए कोई निर्देश नहीं दिए क्या की उनको कितना क्लास लेना है,