Teacher News। अजब शिक्षा विभाग की गजब कहानी जारी है। एक तरफ स्कूलों में शिक्षकों का टोटा है, दूसरी तरफ शिक्षकों की वैसे स्कूलों में पोस्टिंग है, जहां छात्र है ही नहीं। तीन बच्चों को पढ़ाने के लिए प्राचार्य सहित 8 शिक्षकों की तैनाती है। हैरानी की बात ये है कि इस मामले की जानकारी DEO को भी है, जो अब उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन लेने की बात कह रहे हैं।
मामला छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का है, जहां जिले के समेली हाई स्कूल में महज तीन छात्र पढ़ रहे हैं, जबकि उन्हें पढ़ाने के लिए पांच नियमित और तीन अतिथि शिक्षकों समेत कुल आठ शिक्षक तैनात हैं। दावा किया जा रहा है कि इन तीन विद्यार्थियों की पढ़ाई पर हर महीने छह लाख रुपये से अधिक खर्च हो रहे हैं।
वहीं, स्कूल भवन, फर्नीचर और अन्य सुविधाओं पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की जानकारी सामने आई है। मामले को लेकर विभागीय व्यवस्था और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं।
समेली हाई स्कूल में 3 छात्र, 8 शिक्षक तैनात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, समेली हाई स्कूल में कक्षा 10वीं में दो और कक्षा 9वीं में केवल एक छात्र दर्ज है। इस तरह स्कूल में कुल विद्यार्थियों की संख्या तीन है। दूसरी ओर, इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पांच नियमित शिक्षकों और तीन अतिथि शिक्षकों की तैनाती की गई है।
स्कूल में विद्यार्थियों की तुलना में शिक्षकों की संख्या अधिक होने के कारण यह मामला चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शिक्षकों के वेतन और मानदेय पर हर महीने छह लाख रुपये से अधिक खर्च होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या इतनी कम है, तो शिक्षकों की तैनाती और संसाधनों के इस्तेमाल की समीक्षा क्यों नहीं की गई।
स्कूल भवन पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की जानकारी
समेली हाई स्कूल में केवल तीन विद्यार्थियों के नामांकन के बावजूद स्कूल भवन, फर्नीचर और अन्य सुविधाओं पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की जानकारी सामने आई है।सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है।
लेकिन यदि स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम बनी रहती है, तो उपलब्ध संसाधनों के उपयोग और नामांकन बढ़ाने के प्रयासों की समीक्षा करना जरूरी हो जाता है।इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के पीछे क्या कारण हैं और विभाग की ओर से नामांकन बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
बच्चों को एडमिशन नहीं मिलने का आरोप, ग्रामीणों में नाराजगी
मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि आसपास के क्षेत्रों के कुछ बच्चों ने समेली हाई स्कूल में प्रवेश लेने के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें दाखिला नहीं दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन बच्चों को प्रवेश मिल जाता, तो स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बच्चे स्कूल में पढ़ना चाहते थे, तो उन्हें प्रवेश क्यों नहीं मिला?
हालांकि, प्रवेश नहीं देने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित आवेदनों की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। इस संबंध में स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
शिक्षा विभाग की निगरानी पर उठ रहे सवाल
समेली हाई स्कूल का मामला सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षकों की तैनाती और बजट के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।एक ओर राज्य में सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर किसी स्कूल में केवल तीन विद्यार्थियों का नामांकन होना विभागीय निगरानी और शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को दर्शाता है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में स्कूल की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करता है या नहीं। साथ ही, विद्यार्थियों की संख्या कम होने और ग्रामीणों की ओर से लगाए गए प्रवेश संबंधी आरोपों पर विभाग क्या स्पष्टीकरण देता है।फिलहाल इस मामले में विभागीय जांच या किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।










