धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में गंगरेल बांध में जारी जल सत्याग्रह से जुड़ी एक बड़ी अपडेट है। प्रदर्शन के दौरान आठ आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ गई। इनमें लक्ष्मी बाई पटेल भी शामिल हैं। आंदोलनकारियों की हालत खराब होने के बाद मौके पर 108 एंबुलेंस बुलानी पड़ी। डूब प्रभावितों का जल सत्याग्रह और अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन 12 अक्टूबर से जारी है।
आंदोलनकारी हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद छह साल से भूमि आवंटन और व्यवस्थापन नहीं होने से नाराज हैं। उनकी मांग है कि पात्र विस्थापित परिवारों को जल्द जमीन का पट्टा दिया जाए।
12 अक्टूबर से पानी में उतरकर कर रहे आंदोलन
आपको बता दें कि गंगरेल बांध प्रभावित जनकल्याण समिति के बैनर तले डूब प्रभावित अपनी मांगों को लेकर जल सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।जल सत्याग्रह के दौरान आठ लोगों की तबीयत बिगड़ने से आंदोलनकारियों की चिंता बढ़ गई है। लगातार जारी प्रदर्शन के बीच स्वास्थ्य संबंधी परेशानी सामने आने के बाद 108 एंबुलेंस की मदद लेनी पड़ी।
हाईकोर्ट के आदेश के छह साल बाद भी नहीं मिला जमीन का पट्टा
गंगरेल बांध प्रभावित जनकल्याण समिति के संरक्षक महाराजी राम ध्रुव, अध्यक्ष आत्माराम ध्रुव और अन्य आंदोलनकारियों का कहना है कि डूब प्रभावितों को भूमि आवंटन और उनके अधिकारों को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2020 को आदेश पारित किया था। इसके बावजूद पात्र परिवारों को अब तक भूमि आवंटित नहीं की गई है।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आदेश के पालन में आवश्यक जांच और भूमि आवंटन की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी नाराजगी के चलते उन्हें जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाना पड़ा है।
बांध निर्माण में डूबे थे 52 गांव, विस्थापित परिवार आज भी परेशान
आंदोलनकारियों के अनुसार, गंगरेल बांध के निर्माण के दौरान 52 गांव डूब क्षेत्र में आ गये थे। इनमें से अधिकांश परिवारों को आसपास के गांवों में बसाया गया, लेकिन कई परिवारों को उचित जगह नहीं मिल पायी। कुछ परिवार खुद ही दूसरे गांवों में चले गये, जबकि कई लोग लंबे समय तक पुनर्वास और जमीन के लिए भटकते रहे।
प्रभावितों का कहना है कि विस्थापन के वर्षों बाद भी उनके भूमि संबंधी अधिकारों और व्यवस्थापन का मामला लंबित है। पात्र परिवारों को जमीन का पट्टा मिलने से उनकी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
प्रशासन की ओर से बनाई गई जांच समिति
मामले में नायब तहसीलदार दुर्गेश तंवर ने बताया कि जोगीडीह के लोग गंगरेल बांध के विस्थापित परिवार हैं और पट्टे की मांग कर रहे हैं। कलेक्टर के निर्देश पर इस संबंध में एक समिति बनाई गई है, जो जांच कर रही है।उन्होंने कहा कि पट्टा देने से पहले यह सत्यापित किया जा रहा है कि संबंधित परिवार वास्तव में विस्थापित परिवारों की श्रेणी में आते हैं या नहीं। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इन गांवों के लोग हुए थे प्रभावित
गंगरेल बांध निर्माण के दौरान गंगरेल, चंवर, चापगांव, तुमाखुर्द, बारगरी, कोड़ेगांव, मोंगरागहन, सिंघोला, मुड़पार, कोरलमा, कोकड़ी, तुमाबुजुर्ग, कोलियारी, तिर्रा, चिखली, कोहका, मोंगरी, विश्रामपुरी, उरपुटी, कलारबाहरा और किशनपुरी समेत कुल 52 गांव डूब क्षेत्र में आये थे।इन गांवों के प्रभावित परिवार भूमि आवंटन और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों की सेहत बिगड़ने से बढ़ी चिंता
गंगरेल बांध में जल सत्याग्रह के दौरान आठ आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने की घटना ने आंदोलन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रदर्शनकारी हाईकोर्ट के आदेश के पालन और भूमि आवंटन की मांग पर अड़े हैं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि पात्र परिवारों की पहचान के लिए जांच की जा रही है।अब देखना होगा कि प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच इस मामले में कोई समाधान निकलता है या जल सत्याग्रह आगे भी जारी रहता है।










