रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रही कथित मनमानी और आदेशों की अनदेखी पर अब लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सख्त रुख अपनाया है। शासन के निर्देशों के बावजूद कई गैर-शैक्षणिक कर्मचारी संलग्नीकरण (अटैचमेंट) समाप्त होने के बाद भी न तो मूल पदस्थ संस्था में नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं और न ही ऑनलाइन ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए डीपीआई ने कड़ा आदेश जारी किया है।
डीपीआई के अनुसार, विभाग की ओर से पहले भी कई बार सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त कर उन्हें मूल पदस्थ संस्था में लौटने और ऑनलाइन ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए जा चुके थे। इसके बावजूद कई कर्मचारी आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं।
सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन माना
डीपीआई ने स्पष्ट किया है कि संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद भी मूल पदस्थ संस्था में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन है। ऐसे मामलों को अब विभाग ने अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना है।
एक सप्ताह में मूल पदस्थ संस्था में लौटने का आदेश
जारी आदेश में सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से संलग्न संस्थान से कार्यमुक्त कर एक सप्ताह के भीतर अपनी मूल पदस्थ शाला या कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करने और ऑनलाइन ऐप के माध्यम से नियमित उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं तो जुलाई का वेतन रुकेगा
डीपीआई ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कर्मचारी मूल पदस्थ संस्था में उपस्थित होकर ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं करते हैं, तो जुलाई 2026 का वेतन रोक दिया जाएगा। इतना ही नहीं, आदेश का पालन नहीं करने वालों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
जिला शिक्षा अधिकारियों को भी जिम्मेदारी
संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को आदेश के पालन की निगरानी करने और एक सप्ताह के भीतर अनुपालन प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए हैं। इससे स्पष्ट है कि इस बार विभाग आदेशों के पालन को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।
विभाग में बढ़ेगी जवाबदेही
शिक्षा विभाग के इस आदेश को प्रशासनिक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से संलग्नीकरण, अनुपस्थिति और आदेशों की अनदेखी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच डीपीआई का यह कदम विभागीय जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।










