Durg News: दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक से शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। युक्तियुक्तकरण के तहत तबादला होने के बाद एक शिक्षक ने न पुरानी पदस्थापना पर ड्यूटी की और न ही नई जगह जॉइनिंग दी, इसके बावजूद करीब 12 से 13 महीने तक उसके खाते में वेतन जाता रहा। मामला सामने आने के बाद अब विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
मामला धमधा ब्लॉक के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला तितुरडीह से जुड़ा है। यहां पदस्थ शिक्षक (एलबी) देवेंद्र राय का युक्तियुक्तकरण के तहत तबादला किया गया था। आरोप है कि तबादले के बाद शिक्षक ने नई जगह कार्यभार ग्रहण नहीं किया और पुरानी जगह भी ड्यूटी नहीं की। इसके बावजूद वेतन आहरण जारी रहा।
न ड्यूटी, न जॉइनिंग… फिर भी 12 महीने वेतन!
मामले की सबसे बड़ी हैरानी यही है कि एक-दो महीने नहीं, बल्कि करीब 12 से 13 महीने तक वेतन आहरण होता रहा। सवाल यह है कि जिस कर्मचारी की उपस्थिति और पदस्थापना विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज होती है, उसकी ड्यूटी और वेतन का सत्यापन करने वाली व्यवस्था इतने लंबे समय तक कैसे निष्क्रिय रही?
दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत धीर के मुताबिक प्रथम दृष्टया करीब 12 से 13 महीने का वेतन आहरण होना पाया गया है। मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डिजिटल हाजिरी और मॉनिटरिंग के दावों के बीच बड़ा सवाल
शिक्षा विभाग में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर डिजिटल सिस्टम और लगातार मॉनिटरिंग की बात कही जाती है। ऐसे में यह मामला विभागीय निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
अगर शिक्षक वास्तव में इतने लंबे समय तक स्कूल में उपस्थित नहीं था, तो उसकी अनुपस्थिति किस स्तर पर सत्यापित होती रही? पे-बिल किस आधार पर तैयार हुआ? वेतन भुगतान के लिए किस स्तर पर सत्यापन किया गया?
ये सवाल अब जांच के केंद्र में हैं।
एक तरफ शिक्षक की कमी, दूसरी तरफ घर बैठे वेतन?
इस मामले ने धमधा ब्लॉक की शिक्षा व्यवस्था की एक और तस्वीर सामने ला दी है। एक ओर क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। पेंड्रावन हायर सेकेंडरी स्कूल समेत कई जगह शिक्षक की मांग को लेकर विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों को प्रदर्शन तक करना पड़ा।
वहीं दूसरी तरफ एक शिक्षक के लंबे समय तक ड्यूटी से बाहर रहने के बावजूद वेतन भुगतान का मामला सामने आया है। इससे विभागीय व्यवस्था और प्राथमिकताओं पर सवाल उठ रहे हैं।
पे-बिल पास करने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में?
किसी सरकारी कर्मचारी का वेतन केवल उसके खाते में अपने आप नहीं पहुंचता। इसके पीछे उपस्थिति, सेवा रिकॉर्ड, पे-बिल और संबंधित स्तरों पर सत्यापन की प्रक्रिया होती है।
ऐसे में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि 12-13 महीने तक वेतन भुगतान किस प्रक्रिया के तहत होता रहा और संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन किसने किया। यदि जांच में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय करना विभाग के सामने बड़ी चुनौती होगी।
डीईओ ने BEO को जारी किया नोटिस
मामला सामने आने के बाद दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत धीर ने धमधा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
डीईओ के मुताबिक प्रारंभिक तौर पर शिक्षक के करीब 12 से 13 महीने के वेतन आहरण की जानकारी सामने आई है। अब यह जांच का विषय है कि वेतन किस आधार पर जारी हुआ और इस पूरी प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।
अब जांच बताएगी गलती कहां हुई
फिलहाल विभाग ने BEO से जवाब तलब किया है, लेकिन असली सवाल सिर्फ एक शिक्षक के वेतन तक सीमित नहीं है। सवाल उस सिस्टम का है, जो एक कर्मचारी की ड्यूटी और वेतन के बीच तालमेल नहीं बैठा सका।
यदि जांच में शिक्षक के बिना ड्यूटी वेतन लेने की पुष्टि होती है तो वेतन की वसूली, विभागीय कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने जैसे कदम भी महत्वपूर्ण होंगे।
अब देखना होगा कि जांच केवल नोटिस और जवाब तक सीमित रहती है या बिना ड्यूटी वेतन जारी होने की पूरी श्रृंखला की जिम्मेदारी भी तय की जाती है।










