रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का गुरुवार को चौथा दिन था। आज फिर प्रश्नकाल में कई सवालों पर विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी तीखे तेवर दिखाये। इस दौरान अल्दा गांव में कथित फर्जी ग्रामसभा के आधार पर उद्योग स्थापना का मामला जोरदार तरीके से उठा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि एक साल बीत जाने के बाद भी असली जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रश्नकाल के दौरान वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री ओपी चौधरी ने सदन को बताया कि जांच में ग्रामसभा के प्रस्ताव में अनियमितता सामने आई है। मामले की जांच कराई गई है और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना की जा रही है।
इस पर भूपेश बघेल ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामसभा का पंजीयन रजिस्टर सचिव के पास रहता है, ऐसे में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का क्या औचित्य है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरपंच और सचिव को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत के करीब एक साल के बाद मामला दर्ज किया गया और वो भी अज्ञात लोगों के खिलाफ, ऐसे में मंशा यही लग रही है कि विभाग दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
भूपेश बघेल ने यह भी पूछा कि जिन लोगों को इस कथित फर्जी ग्रामसभा से लाभ मिला, उनके खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि घटना को एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि, क्या इतने दिनों में अभी तक जांच ही नहीं हो पायी है?
जवाब में मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित ग्राम पंचायत का जवाब प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक जमीन का आवंटन नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में कोई भी दोषी बचेगा नहीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरपंच-सचिव कोई भी दोषी हो, कार्रवाई होगी।
हालांकि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में विरोध दर्ज कराते हुए बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया। फर्जी ग्रामसभा और उद्योग स्थापना का यह मुद्दा विधानसभा में राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहा।










