रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर बुधवार को सड़क से लेकर विधानसभा तक जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला। एक ओर कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में नकटी गांव से राजभवन तक पदयात्रा निकालकर पीड़ित परिवारों के समर्थन में प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर विधानसभा में इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश की। हालांकि स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया और गर्भगृह में पहुंचकर नारेबाजी की।
नकटी से राजभवन तक कांग्रेस की पदयात्रा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता नकटी गांव से लोकभवन (राजभवन) की ओर पैदल मार्च पर निकले। पदयात्रा में नकटी गांव के प्रभावित परिवार भी शामिल हुए।यात्रा के दौरान दीपक बैज ने ग्रामीणों के साथ सड़क किनारे बैठकर भोजन किया।
बताया गया कि पदयात्रा के दौरान उनके पैर में मोच आ गई, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने यात्रा नहीं छोड़ी और पीड़ित परिवारों के साथ पैदल चलते रहे।बैज ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई केवल विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के अधिकारों के लिए सड़क पर भी जारी रहेगी।
“एक लड़ाई हम सदन में लड़ रहे हैं और दूसरी सड़क पर। अंतिम सांस तक कांग्रेस पार्टी जनता के हितों के लिए खड़ी रहेगी।”
— दीपक बैज
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर नकटी गांव के प्रभावित परिवारों की मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने का भी ऐलान किया।
विधानसभा में नकटी पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने नकटी गांव में हुई कार्रवाई को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने 85 परिवारों के घर तोड़कर गरीबों को बेघर कर दिया और मानसून के बीच की गई कार्रवाई अमानवीय एवं असंवैधानिक है।
बहस के दौरान विधायक उमेश पटेल ने सवाल उठाया कि बारिश के मौसम में ही कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई में प्रधानमंत्री आवास तक तोड़ दिया गया और चार गाय व बछिया की भी मौत हो गई।
विधायक कवासी लखमा ने कहा कि प्रशासन चाहता तो चार महीने बाद भी कार्रवाई कर सकता था, लेकिन बारिश के दौरान लोगों को बेघर कर दिया गया।
चरणदास महंत के वक्तव्य पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताई, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
सरकार का जवाब- कार्रवाई पूरी तरह कानून के अनुसार
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नकटी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह न्यायालयीन प्रक्रिया और कानून के तहत की गई।
उन्होंने सदन को बताया कि—
• सभी अतिक्रमणकारियों को पहले ही नोटिस जारी किए गए थे।
• पटवारी से प्रतिवेदन प्राप्त किया गया था।
• बेदखली की कार्रवाई नियमानुसार की गई।
• प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी की गई।
• घरेलू सामान को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
• यह कहना गलत है कि कार्रवाई बारिश के दौरान प्रभावित परिस्थितियों में की गई।
स्थगन प्रस्ताव खारिज, सदन में हंगामा
सरकार के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायक अपनी सीटों से उठकर गर्भगृह में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
गर्भगृह में पहुंचने के कारण विपक्ष के सभी विधायक नियमों के तहत स्वमेव निलंबित हो गए। इसके बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए।
नकटी गांव का मुद्दा बुधवार को पूरे दिन प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहा। कांग्रेस ने जहां इसे गरीबों और विस्थापित परिवारों की लड़ाई बताया, वहीं सरकार ने पूरी कार्रवाई को कानून सम्मत और नियमानुसार बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया।










