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CG : राष्ट्रपति भवन में गूंजी धमतरी की मांदर थाप, सरईटोला के कलाकारों ने राष्ट्रीय मंच पर बिखेरी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की छटा, कलेक्टर ने पूरी टीम को दी बधाई,

August 18, 2026 12:52 PM
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धमतरी, 18 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ की धरती अपनी समृद्ध आदिवासी लोककला, जीवंत परंपराओं और सामुदायिक सांस्कृतिक विरासत के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखती है। इस सांस्कृतिक विरासत की सशक्त झलक बीते 15 अगस्त को देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के सेंट्रल हॉल में देखने को मिली, जब धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के ग्राम सरईटोला (गुडरापारा) के सुप्रसिद्ध ‘जय गढ़िया बाबा आदिवासी लोक मांदरी नृत्य दल’ ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पारंपरिक लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति की गरिमा को राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित किया।

राष्ट्रपति भवन जैसे देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान के प्रतिष्ठित परिसर में मांदर की थाप, पारंपरिक गीतों और सामूहिक नृत्य की लय ने वातावरण को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। ग्रामीण अंचल के कलाकारों के लिए यह अवसर उनकी कला-साधना का सम्मान तो था ही, साथ ही धमतरी जिले और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण भी रहा।

मांदर की थाप में जीवंत हुई जनजातीय संस्कृति

सरईटोला का यह लोक नृत्य दल अपनी विशिष्ट पारंपरिक नृत्य शैली, गुट्टा मांदर की ऊर्जावान थाप, लोकगीतों, पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्यों के लिए जाना जाता है। दल की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज के लोकजीवन, उत्सव, सामाजिक सरोकार, सामुदायिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति दिखाई देती है।

रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान, आभूषण और साज-सज्जा कलाकारों की प्रस्तुति को और आकर्षक बनाते हैं। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि लोकस्मृतियों, सामाजिक जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। फसल कटाई, उत्सव, मेले और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक अवसरों पर इसकी विशेष प्रस्तुति की परंपरा रही है।

नागपुर सांस्कृतिक भवन द्वारा हुआ विशेष चयन

दल के सचिव श्री रूपराय नेताम ने बताया कि नागपुर सांस्कृतिक भवन द्वारा दल की उत्कृष्ट प्रस्तुति और पारंपरिक कला की विशिष्टता को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति हेतु दल का चयन किया गया। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान के प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ की लोककला प्रस्तुत करना कलाकारों के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है।

सरईटोला से राष्ट्रपति भवन तक—प्रतिभा की गौरवगाथा

इस ऐतिहासिक अवसर पर सरईटोला के श्री रतन लाल निषाद, श्री सुरेंद्र सोरी, श्री हेमंत सोरी, कु. सुलोचना सोरी और कु. मधु नेताम सहित दल के कलाकारों ने नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।

ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय राजधानी के प्रतिष्ठित मंच तक पहुंची यह सांस्कृतिक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि लोककला आज भी अपनी मौलिकता, जीवंतता और जनसरोकारों के कारण लोगों के हृदय में गहरी जगह बनाए हुए है। यह उपलब्धि जिले के युवा कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का संदेश है कि अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़कर प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है।

कलेक्टर श्री मिश्रा ने कलाकारों और समिति के सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा था कि राष्ट्रीय मंच पर धमतरी जिले की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और आदिवासी कला का प्रदर्शन पूरे जिले के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां जिले की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं से जुड़ने और उन्हें आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती हैं।

कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि धमतरी की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक और कृषि समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की लोककला, लोकसंगीत, जनजातीय परंपराएं और सांस्कृतिक विविधता भी जिले की अमूल्य धरोहर हैं। सरईटोला के कलाकारों की राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति इस सांस्कृतिक विरासत को देश के सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कलाकारों की प्रस्तुति धमतरी की सांस्कृतिक समृद्धि की सशक्त पहचान बनेगी।

लोककला को संरक्षण, कलाकारों को प्रोत्साहन

धमतरी जिले के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वाद्य और उत्सवों से जुड़ी अनेक सांस्कृतिक परंपराएं आज भी जीवंत हैं। ऐसे कलाकारों को मंच और पहचान मिलना इन परंपराओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रपति भवन में हुई यह प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि धमतरी की माटी, छत्तीसगढ़ की लोक आत्मा और पीढ़ियों से संजोई गई आदिवासी सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय अभिव्यक्ति बनी। मांदर की गूंज ने यह संदेश दिया कि गांवों की सांस्कृतिक धरोहर जब राष्ट्रीय मंच तक पहुंचती है, तो वह केवल कलाकारों का गौरव नहीं बढ़ाती, बल्कि पूरे समाज की पहचान को नई प्रतिष्ठा प्रदान करती है।

सरईटोला के कलाकारों की यह उपलब्धि धमतरी की लोकसंस्कृति के लिए एक नई पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायी सांस्कृतिक विरासत के रूप में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगी।

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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