रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में शनिवार शाम बड़ा एक्शन हुआ। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए CGPSC के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर दिया। अब इस गिरफ्तारी व ED की ली गयी रिमांड पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा बयान दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा,
“पिछली कांग्रेस सरकार में छत्तीसगढ़ के छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश के युवाओं से वादा किया था कि CGPSC घोटाले की निष्पक्ष जांच होगी। हमारी सरकार उसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। भ्रष्टाचार के मामलों में हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है। किसी भी क्षेत्र में कोई अपराध करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। जो भी दोषी हैं, उन पर कार्रवाई की जा रही है।”
ED ने पूर्व चेयरमैन टामन सोनवानी को किया गिरफ्तार
मुख्यमंत्री के बयान के पूर्व शनिवार को CGPSC-2021 भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर लिया है। सोनवानी पहले से ही रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में थे। ईडी ने विशेष अदालत से प्रोडक्शन वारंट हासिल कर जेल में लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
31 जुलाई तक सात दिन की रिमांड
गिरफ्तारी के बाद ईडी ने विशेष अदालत से कस्टोडियल रिमांड मांगी। अदालत ने एजेंसी की मांग स्वीकार करते हुए टामन सिंह सोनवानी को 31 जुलाई तक सात दिनों की ईडी रिमांड पर भेज दिया। इस दौरान भर्ती प्रक्रिया में कथित वित्तीय लेनदेन, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आरोपों से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जाएगी।
2021 भर्ती घोटाले की जांच तेज
CGPSC-2021 भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता, भाई-भतीजावाद और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे। इसी मामले में सीबीआई पहले ही पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी सहित 29 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। अब ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पूरे मामले की जांच कर रही है।आरोप है कि रसूखदार और प्रभावशाली लोगों के नात-रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे प्रतिष्ठित पदों पर चयनित कराने के लिए चयन प्रक्रिया के साथ सुनियोजित तरीके से खिलवाड़ किया गया था। इस धांधली के एवज में भारी-भरकम रकम के लेन-देन की बात भी सामने आई थी।


















