रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य शिक्षक सम्मान के चयन का मापदंड बदलने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने शिक्षक सम्मान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रदर्शन आधारित बनाने की तैयारी की है। अब शिक्षक सम्मान के लिए केवल वरिष्ठता या सिफारिश नहीं, बल्कि छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन, स्कूल के विकास में योगदान और शिक्षक की पेशेवर दक्षता को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। शिक्षा विभाग ने पुराने प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए नए फील्ड-आधारित मूल्यांकन मानदंड तय किए हैं।
पिछले पांच वर्षों का प्रदर्शन बनेगा चयन का आधार
नई व्यवस्था के अनुसार राज्य शिक्षक सम्मान के लिए वही शिक्षक और प्राचार्य पात्र होंगे, जिनके छात्रों ने पिछले पांच वर्षों में बोर्ड परीक्षाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया हो। चयन के दौरान 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों को सबसे अधिक महत्व दिया जाएगा।विशेष रूप से उन शिक्षकों को प्राथमिकता मिलेगी, जिनके विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षाओं में टॉप स्थान हासिल किया है। इसके अलावा शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों को भी पुरस्कार के लिए पात्र माना जाएगा।
अनुभव की शर्त में नहीं हुआ बदलाव
शिक्षक सम्मान के लिए अनुभव संबंधी नियम पहले की तरह लागू रहेंगे। इसके तहत—
- शिक्षक के लिए न्यूनतम 15 वर्ष का अनुभव अनिवार्य होगा।
- प्राचार्य के लिए 20 वर्ष का अनुभव जरूरी रहेगा।
2019-20 में हुए बदलाव अब होंगे सख्ती से लागू
शिक्षक सम्मान के मापदंडों में वर्ष 2019-20 में ही संशोधन किया गया था, लेकिन इनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा था। अब शिक्षा विभाग इन्हें पूरी गंभीरता से लागू करने की तैयारी में है।इस बार फील्ड आधारित मूल्यांकन प्रणाली को अधिक वेटेज (अधिभार) दिया गया है, ताकि वास्तव में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों का चयन हो सके।
इन कार्यों पर मिलेगा अतिरिक्त अधिभार
नई मूल्यांकन प्रणाली में केवल परीक्षा परिणाम ही नहीं, बल्कि शिक्षक के समग्र योगदान को भी महत्व दिया जाएगा। इनमें शामिल हैं—
- ऑनलाइन प्रशिक्षण एवं प्रोफेशनल कोर्स में भागीदारी।
- पीएलसी (Professional Learning Community) के सदस्य के रूप में सक्रिय कार्य।
- स्कूल के शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं अन्य विकासात्मक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका।
- विद्यालय के समग्र विकास में उल्लेखनीय योगदान।
- सुदूर एवं दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य।
- चुनौतियों के बावजूद नियमित शिक्षक की उपस्थिति
शिक्षा की गुणवत्ता को मिलेगा सबसे ज्यादा वेटेज
नई व्यवस्था में शिक्षक द्वारा पढ़ाए जा रहे विद्यार्थियों की शिक्षा की गुणवत्ता को 25 प्रतिशत अधिभार दिया गया है। वहीं दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों के मूल्यांकन में केवल परीक्षा परिणाम ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की संख्या (क्वांटिटी) और शैक्षणिक गुणवत्ता (क्वालिटी) दोनों को आधार बनाया जाएगा।इस बदलाव का उद्देश्य उन शिक्षकों को सम्मानित करना है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी विद्यार्थियों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए हैं और स्कूल के विकास में सक्रिय भूमिका निभाई है।


















