School Teacher News। सुबह आसमान में बादल छाए रहते हैं, कोटरी नदी पूरे उफान पर होती है और रास्तों का कहीं नामोनिशान नहीं दिखता। इसके बावजूद 22 शिक्षक रोज घर से निकलते हैं। पहले बाइक से सफर, फिर नाव का सहारा और आखिर में कई किलोमीटर पैदल चलकर वे जंगलों के बीच बसे स्कूलों तक पहुंचते हैं। उनकी मंजिल सिर्फ एक होती है—बच्चों की पढ़ाई रुके नहीं। लेकिन स्कूल पहुंचने के बाद उनकी सबसे बड़ी परीक्षा शुरू होती है। जहां बच्चे उनका इंतजार कर रहे होते हैं, वहीं मोबाइल नेटवर्क उनका साथ छोड़ देता है। नतीजा, VSK ऐप पर ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाती।
जान जोखिम में डालकर निभा रहे शिक्षक धर्म
हर दिन की ये कहानी है कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड के छोटेबेठिया वनांचल में पदस्थ 22 शिक्षकों की। ये शिक्षक रोज उफनती कोटरी नदी पार कर सितराम, गोपीगुंडा, पलोटोला, राजामुंडा, बागोभोड़िया, आमाटोला और कंदाड़ी जैसे दुर्गम गांवों के स्कूलों तक पहुंचते हैं। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटते। कई जगह सड़कें नहीं हैं, पुल नहीं हैं, फिर भी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षक हर दिन कठिन सफर तय करते हैं।
स्कूल पहुंचे… लेकिन हाजिरी नहीं लगी
शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता अब पढ़ाई नहीं, बल्कि ऑनलाइन अटेंडेंस बन गई है।उनका कहना है कि नई व्यवस्था में ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन बनने की बात सामने आने के बाद चिंता और बढ़ गई है। कई स्कूल ऐसे इलाकों में हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में शिक्षक स्कूल पहुंचने के बावजूद VSK ऐप पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे हैं।उनका सवाल है कि जब नेटवर्क ही नहीं है तो ऑनलाइन हाजिरी कैसे लगेगी?
बच्चों के भविष्य और अपनी नौकरी, दोनों की चिंता
शिक्षकों का कहना है कि वे हर हाल में बच्चों तक शिक्षा पहुंचा रहे हैं। दूसरी ओर विभाग लगातार VSK ऐप और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर नए निर्देश जारी कर रहा है।उनका कहना है कि पहले तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। यदि नेटवर्क और ऐप की दिक्कतें दूर नहीं हुईं तो ईमानदारी से स्कूल पहुंचने वाले शिक्षक भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करेंगे।
सरकार से की यह मांग
शिक्षक राजेश कुमार खरे, शेख इमरान उल्ला, संजय साहू, श्रीमती श्यामा ठाकुर, उत्तम कोमरा, विष्णु राम चुरेंद्र, जयपद देहरी, आत्माराम साहू और फिलोमन खलखो सहित अन्य शिक्षकों ने राज्य सरकार से मांग की है कि पहले VSK ऐप की तकनीकी समस्याओं और नेटवर्क की दिक्कतों का समाधान किया जाए।उनका कहना है कि शिक्षक शिक्षा देने से पीछे नहीं हट रहे हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जो जमीनी हकीकत के अनुरूप हो।
जंगलों में शिक्षा की अलख, लेकिन सिस्टम से जंग जारी
एक तरफ ये शिक्षक हर दिन नदी, जंगल और खराब रास्तों से लड़ते हुए स्कूल पहुंच रहे हैं। दूसरी तरफ नेटवर्क की कमी के कारण उन्हें अपनी मौजूदगी ही साबित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।यह सिर्फ ऑनलाइन अटेंडेंस का मुद्दा नहीं, बल्कि उन शिक्षकों की कहानी है जो हर दिन कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
शिक्षा विभाग आनलाइन अटेंडेंस पर सख्त
VSK ऐप से अटेंडेंस को लेकर इस बार शिक्षा विभाग काफी सख्त है। जुलाई माह के वेतन रोकने का आदेश तो पहले हो ही चुका है अब विभाग उन शिक्षकों की भी लिस्ट तैयार कर रहा है, जिन्होंने जानबूझकर आनलाइन अटेंडेंस नहीं बनाया है। शिक्षा विभाग के सूत्र बताते हैं कि करीब 100 से ज्यादा शिक्षकों की ब्रेक इन सर्विस की तैयारी चल रही है। शिक्षा विभाग का दावा है कि जिलों से उन शिक्षकों को खासकर चिन्हित किया गया है, जो मनमर्जी को अपना अधिकार मान बैठे हैं।


















