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Bilaspur Medical Reimbursement Scam: शिक्षा विभाग में 30 लाख के फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में FIR, सस्पेंड शिक्षक गिरफ्तार

बिलासपुर शिक्षा विभाग में 30 लाख रुपए के फर्जी मेडिकल रीइंबर्समेंट बिल घोटाले में बड़ा एक्शन। सस्पेंड शिक्षक साधेलाल पटेल के खिलाफ FIR दर्ज, गिरफ्तारी के बाद तबीयत बिगड़ी। पत्नी और रिश्तेदारों के खातों में रकम ट्रांसफर होने का खुलासा।

July 31, 2026 5:51 AM
DEO OFFICE BILASPUR FILE FOTO
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग के बहुचर्चित फर्जी मेडिकल रीइंबर्समेंट बिल घोटाले में महीनों बाद बड़ा एक्शन हुआ है। करीब 30 लाख रुपए की हेराफेरी के मामले में कोतवाली पुलिस ने संकुल समन्वयक और शिक्षक नेता साधेलाल पटेल के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल सहित चार गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी की तबीयत बिगड़ने पर उसे सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।करीब 10 महीने पहले विभागीय जांच में घोटाले का खुलासा होने के बाद साधेलाल पटेल और उनकी पत्नी राजकुमारी पटेल को निलंबित कर दिया गया था। अब पुलिस ने आपराधिक जांच भी शुरू कर दी है।

77 हजार के बिल को बना दिया 7 लाख का दावा

शिकायत के बाद जब इस मामले में विभागीय जांच की गयी, तो चौकाने वाली जानकारी सामने आयी। शिक्षक एलबी एवं संकुल समन्वयक साधेलाल पटेल ने कई कर्मचारियों के मेडिकल रीइंबर्समेंट बिलों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया। 77 हजार, 47 हजार और 32 हजार रुपए के वास्तविक मेडिकल बिलों में कथित तौर पर हेरफेर कर उन्हें 4 से 7 लाख रुपए तक का दिखाकर भुगतान प्राप्त किया गया।जांच में यह भी खुलासा हुआ कि एक मृत शिक्षक के नाम पर भी फर्जी मेडिकल बिल तैयार कर सरकारी राशि निकाली गई।

पत्नी और रिश्तेदारों के खातों में पहुंची लाखों की रकम

शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार, साधेलाल पटेल ने फर्जी सील और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर भुगतान की राशि अपने मृतक साले, पत्नी राजकुमारी पटेल और अन्य रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराई।रिपोर्ट में बताया गया कि 33,123 रुपए और 40,947 रुपए का वैध भुगतान संबंधित कर्मचारियों को पहले ही किया जा चुका था। इसके बावजूद उन्हीं देयकों के आधार पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर दोबारा भुगतान कराया गया। इस प्रक्रिया में 4.33 लाख रुपए और 2.40 लाख रुपए अलग-अलग खातों में जमा कराए गए।

पति-पत्नी पहले ही हो चुके हैं सस्पेंड

मामले के सामने आने के बाद संयुक्त संचालक आर.पी. आदित्य ने संकुल प्रभारी साधेलाल पटेल को निलंबित कर दिया था। जांच में पत्नी राजकुमारी पटेल, जो बैगा स्कूल में प्रधान पाठक थीं, की भूमिका सामने आने पर उन्हें भी सस्पेंड कर दिया गया।

10 महीने बाद दर्ज हुई FIR

संयुक्त संचालक ने जांच पूरी होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। डीईओ ने इसकी जिम्मेदारी बिल्हा के बीईओ को सौंपी थी।विभाग का दावा है कि सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर पुलिस को सौंप दिए गए थे, लेकिन एफआईआर दर्ज होने में करीब 10 महीने का समय लग गया। अब कोतवाली पुलिस ने मूल दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

पुराने मेडिकल दावों में भी मिली गड़बड़ी

जांच में यह भी सामने आया कि 3 से 4 साल पुराने मेडिकल दावों को नियमों के विपरीत प्रस्तुत कर अधिकारियों की कथित मिलीभगत से कोषालय से भुगतान कराया गया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने साधेलाल पटेल को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, थाने पहुंचने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और चक्कर आने लगे। इसके बाद उसे तत्काल सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है।पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।

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