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Chhattisgarh High Court Lecturer Posting Case: व्याख्याता को मूल स्कूल भेजने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, सचिव, DPI समेत 4 अधिकारियों को नोटिस

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूरजपुर के व्याख्याता सत्यप्रकाश दुबे को मूल विद्यालय भेजने के कार्यमुक्ति आदेश पर रोक लगा दी। शिक्षा विभाग, DEO और कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।

August 1, 2026 10:19 AM
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Surajpur News | Chhattisgarh High Court | Lecturer Posting Case

बिलासपुर/सूरजपुर। शिक्षकों को मूल शाला में रिलिविंग को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा अहम निर्देश दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूरजपुर जिले के एक व्याख्याता को उनके मूल पदस्थ विद्यालय में कार्यमुक्त किए जाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सूरजपुर के आदेश पर रोक लगाते हुए शिक्षा विभाग के सचिव, लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक, कलेक्टर सूरजपुर और जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

जानिये क्या है पूरा मामला?

दरअसल सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दवना में व्याख्याता (गणित) के पद पर पदस्थ सत्यप्रकाश दुबे को जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर ने 15 जुलाई 2026 को उनके मूल पदस्थ विद्यालय शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भटगांव (विकासखंड भैयाथान) के लिए कार्यमुक्त कर दिया था।इस आदेश को चुनौती देते हुए सत्यप्रकाश दुबे ने अधिवक्ता वेदांत षडंगी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।

वर्ष 2021 में हुई थी नियुक्ति

याचिका के अनुसार, सत्यप्रकाश दुबे की पहली नियुक्ति वर्ष 2021 में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भटगांव में हुई थी। लेकिन वहां व्याख्याता (गणित) का पद रिक्त नहीं होने के कारण जिला शिक्षा अधिकारी ने 6 जुलाई 2021 को उन्हें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दवना में पदस्थ कर दिया था। तब से वे वहीं शिक्षण कार्य कर रहे थे।

युक्तियुक्तकरण सूची में भी नहीं था नाम

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार द्वारा जारी युक्तियुक्तकरण (Rationalization) प्रक्रिया की सूची में भी उनका नाम अतिशेष (Surplus) कर्मचारियों की सूची में शामिल नहीं था। इसके बावजूद बिना यह जांच किए कि मूल विद्यालय में गणित व्याख्याता का पद रिक्त है या नहीं, उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया।

SHIK PRTINIYUKTI

हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई?

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वेदांत षडंगी ने अदालत में तर्क दिया कि संचालक लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों के पालन में कार्यमुक्ति आदेश जारी किया गया, लेकिन मूल विद्यालय में पद रिक्त नहीं होने के कारण वहां पदस्थापना संभव नहीं थी। ऐसे में रिक्त पद पर कार्यरत शिक्षक को कार्यमुक्त करना नियमों के विपरीत है।

हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक

मामले की सुनवाई 28 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति विभू दत्ता गुरु की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर के 15 जुलाई 2026 के कार्यमुक्ति आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।अदालत ने शिक्षा विभाग के सचिव, लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक, कलेक्टर सूरजपुर और जिला शिक्षा अधिकारी सूरजपुर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही याचिकाकर्ता सत्यप्रकाश दुबे को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दवना में पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति प्रदान की है।

आदेश का क्या पड़ सकता है असर

यह आदेश उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्हें युक्तियुक्तकरण या मूल पदस्थापना के नाम पर बिना रिक्त पद की जांच किए कार्यमुक्त किया जा रहा है। अंतिम फैसला आने तक यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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