हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने क्या फैसला लिया? सरकार ने क्यों खारिज की पहली नियुक्ति से पेंशन की मांग? 30 जून 2018 के आदेश की किन शर्तों का दिया गया हवाला? अब शिक्षक एलबी की पेंशन कैसे तय होगी? देखिये क्या है इसका जवाब…
रायपुर। छत्तीसगढ़ के करीब 1.5 लाख शिक्षक (एलबी) को बड़ा झटका लगा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक एलबी पेंशन की गणना पहली नियुक्ति की तारीख से नहीं होगी। विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवा लाभों के लिए केवल 1 जुलाई 2018 की संविलियन तिथि को ही आधार माना जाएगा। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने शिक्षकों की मांग को खारिज कर दिया है। छत्तीसगढ़ के करीब 1.50 लाख शिक्षक (एलबी) संवर्ग के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला सुनाया है।
21 जुलाई को जारी आदेश में शिक्षा विभाग के स्पष्ट आदेश से अब शिक्षकों में गहरी मायुसी है। हाईकोर्ट के आदेश के तारतम्य में विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षक (एलबी) की पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना पहली नियुक्ति की तारीख से नहीं, बल्कि 1 जुलाई 2018 यानी संविलियन की तिथि से ही होगी। इसके साथ ही पहली नियुक्ति से सेवाकाल जोड़कर पेंशन देने की मांग को शासन ने औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया है।
स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि शिक्षक (पंचायत/नगरीय निकाय) संवर्ग के कर्मचारियों की संविलियन से पहले की सेवाएं शासकीय सेवा नहीं मानी जा सकतीं। इसलिए उस अवधि को पेंशन अथवा अन्य शासकीय लाभों के लिए नहीं जोड़ा जाएगा।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आया फैसला
यह मामला तब सामने आया जब परमेश्वर प्रसाद जैसवाल एवं अन्य शिक्षक (एलबी) ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि पेंशन और अन्य सेवा लाभों के लिए उनकी सेवा की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाए।
23 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया था कि मामले के संवैधानिक और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तर्कसंगत निर्णय लिया जाए। इसके बाद शासन ने पूरे मामले की समीक्षा की और अंततः शिक्षकों के दावों को अस्वीकार कर दिया।
सरकार ने किन नियमों का दिया हवाला?
शासन ने अपने आदेश में 30 जून 2018 के संविलियन आदेश की दो महत्वपूर्ण शर्तों का उल्लेख किया है—
• कंडिका-4: शिक्षक (एलबी) संवर्ग को मिलने वाले सभी सेवा लाभों की गणना 1 जुलाई 2018 से होगी।
• कंडिका-5: संविलियन से पहले की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के एरियर या अन्य लाभ की पात्रता नहीं होगी।
क्यों नहीं मानी गई मांग?
आदेश के अनुसार, संविलियन से पहले शिक्षक पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत बने नियमों के अंतर्गत कार्यरत थे। उस अवधि में वे राज्य शासन के नियमित शासकीय सेवक नहीं थे, इसलिए उस सेवा अवधि को शासकीय सेवा मानकर पेंशन या अन्य लाभ देने का कोई प्रावधान नहीं है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि 1 जुलाई 2018 को स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन होने के बाद ही शिक्षक (एलबी) संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत लागू सेवा नियमों के दायरे में आए। इसलिए उससे पहले की सेवा को भूतलक्षी (Retrospective) प्रभाव से नहीं जोड़ा जा सकता।
अभ्यावेदन किया गया अमान्य
स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश में कहा है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप पूरे मामले पर विचार किया गया। लेकिन संविलियन आदेश और लागू नियमों के आधार पर याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन को अमान्य कर दिया गया।
शिक्षकों पर क्या पड़ेगा असर?
इस निर्णय का सीधा असर राज्य के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षक (एलबी) पर पड़ सकता है। अब उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति संबंधी लाभों की गणना पहली नियुक्ति की बजाय 1 जुलाई 2018 से ही की जाएगी, जिससे लंबे समय से पहली नियुक्ति की तिथि से सेवा गणना की उम्मीद लगाए बैठे शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है।



















