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DEO-BEO Salary Stopped: DEO की दूसरी गलती पड़ी भारी, वेतन रोकने का निर्देश, कई अफसरों पर गिरी कार्रवाई की गाज, जानिये मामला

जिला शिक्षा अधिकारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी सहित तीन अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं। बीईओ, CMO और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी कार्रवाई की जद में आए।

August 5, 2026 8:46 AM
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कोरबा। DEO सहित तीन अफसरों पर गाज गिरी है। जिम्मेदारी में लापरवाही पर तीनों अफसर के वेतन रोकने का आदेश दिया गया है। मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का है, जहां शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक लगातार समीक्षा बैठकों में चेतावनी और नोटिस के बावजूद सुधार नहीं होने पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) तामेश्वर उपाध्याय का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए हैं। खास बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर उन्हें दूसरी बार नोटिस जारी किया गया है। मंगलवार को आयोजित समय-सीमा (टीएल) बैठक में कलेक्टर ने विभिन्न विभागों की प्रगति, फ्लैगशिप योजनाओं और लंबित प्रकरणों की समीक्षा की।

इस दौरान शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करने और वेतन रोकने का आदेश दिया।

कई विभागों के अधिकारियों पर भी कार्रवाई

सिर्फ शिक्षा विभाग ही नहीं, अन्य विभागों के अधिकारियों पर भी कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया। टीएल प्रकरणों के समय पर निराकरण नहीं होने पर पाली और छुरी नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा पाली के बीईओ के खिलाफ भी कारण बताओ नोटिस जारी कर वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। वहीं नशा मुक्ति अभियान में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाने पर समाज कल्याण विभाग के उप संचालक का वेतन रोकने के भी निर्देश दिए गए।

पहले चेतावनी, अब सीधी कार्रवाई

कलेक्टर कुणाल दुदावत पिछले कई महीनों से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, राजस्व, जनकल्याणकारी योजनाओं और मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। अधिकारियों को बार-बार समयसीमा में काम पूरा करने और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे थे।

लेकिन निर्देशों की अनदेखी और कार्यों में लगातार लापरवाही सामने आने के बाद अब प्रशासन ने सीधे कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। कलेक्टर के इस फैसले को जिले में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

अधिकारियों को मिला स्पष्ट संदेश

कलेक्टर की इस कार्रवाई के बाद जिले के सभी विभागों में साफ संदेश गया है कि शासन की फ्लैगशिप योजनाओं, जनहित के कार्यों और लंबित मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में खराब प्रदर्शन करने वाले अन्य अधिकारियों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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