नगरी। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जनपद सदस्य नगरी एवं आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश महासचिव प्रमोद कुंजाम ने प्रदेश, जिले और क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस अवसर पर आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं, अधिकारों और प्रकृति के साथ उसके सदियों पुराने जुड़ाव को याद किया।
प्रमोद कुंजाम ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1994 में 9 अगस्त को विश्व के आदिवासी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया था। यह दिवस दुनिया भर के आदिवासी समुदायों के अधिकारों, संस्कृति, भाषा, परंपराओं और पहचान के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की असली पहचान उसकी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति से गहरे जुड़ाव में है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में आदिवासी समाज की भूमिका सदियों पुरानी रही है। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की परंपरा आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान रही है।
पुरखों के संघर्ष और विरासत को याद करने का दिन
कुंजाम ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपने पुरखों के संघर्ष और उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत को याद करने का दिन भी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों, सम्मान और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने समाज के लोगों से अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए संकल्प लेने की अपील की।
अंत में प्रमोद कुंजाम ने प्रदेश, जिले और क्षेत्र के समस्त आदिवासी समाज सहित सभी नागरिकों को विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।



















