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कर्मचारियों की हाईकोर्ट से खबर: स्टडी लीव के बाद दोबारा उच्च शिक्षा के लिए NOC नहीं! हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारियों के लिए जानना जरूरी

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्टडी लीव और उच्च शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। पहले अध्ययन अवकाश का लाभ ले चुके कर्मचारी दोबारा Extraordinary Leave या NOC का कानूनी दावा नहीं कर सकते।

August 13, 2026 1:57 AM
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बिलासपुर: शासकीय कर्मचारियों के स्टीडी लीव पर हाईकोर्ट ने अहम फैसला लिया है। कर्मचारियों की उच्च शिक्षा हासिल करने और अध्ययन अवकाश को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी पहले ही विभागीय कोटे के तहत अध्ययन अवकाश लेकर उच्च शिक्षा का लाभ उठा चुके हैं, वे दोबारा असाधारण अवकाश (Extraordinary Leave) या अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने का कानूनी अधिकार नहीं जता सकते।

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि शासकीय सेवा में विभागीय कोटे से उच्च शिक्षा का लाभ बार-बार लेने का अधिकार कर्मचारी को नहीं है। ऐसे मामलों में अवकाश और NOC देना विभाग की प्रशासनिक जरूरतों और नियमों के अधीन रहेगा।

स्टाफ नर्सों ने दायर की थी याचिका

दरअसल यह फैसला न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यरत स्टाफ नर्स सोमलता साहू, मंजू शर्मा और रुखमणी धर दीवान की याचिकाओं पर सुनाया।तीनों कर्मचारियों की नियुक्ति वर्ष 2008 में स्टाफ नर्स के पद पर हुई थी। इसके बाद उन्होंने अध्ययन अवकाश का लाभ लेते हुए पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग का पाठ्यक्रम पूरा किया। बाद में उन्हें डेमोस्ट्रेटर के पद पर पदोन्नति भी मिली।

MSc Nursing के लिए मांगी थी छुट्टी और NOC

बाद में तीनों कर्मचारियों ने एमएससी नर्सिंग की प्रवेश परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने विभाग से बिना वेतन के असाधारण अवकाश और NOC की मांग की, ताकि वे आगे की पढ़ाई पूरी कर सकें।चिकित्सा शिक्षा विभाग ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की। विभाग के फैसले से असंतुष्ट होकर तीनों कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी।

हाई कोर्ट ने नर्सिंग प्रवेश नियमों का दिया हवाला

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ नर्सिंग पाठ्यक्रम प्रवेश नियम, 2019 का संदर्भ लिया। कोर्ट ने कहा कि जो कर्मचारी पहले ही संबंधित विभागीय व्यवस्था के तहत उच्च शिक्षा का लाभ ले चुके हैं, उन्हें बार-बार उसी आधार पर विभागीय कोटे से प्रवेश का लाभ नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना वेतन के असाधारण अवकाश या NOC कर्मचारी का निहित कानूनी अधिकार नहीं है। ऐसे मामलों में विभाग को अपनी प्रशासनिक आवश्यकताओं और उपलब्ध व्यवस्था को ध्यान में रखकर निर्णय लेने का अधिकार है।

तीनों कर्मचारियों की याचिकाएं खारिज

इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने तीनों कर्मचारियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया।इस फैसले का सीधा असर उन शासकीय कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो पहले विभागीय कोटे या अध्ययन अवकाश के माध्यम से उच्च शिक्षा का लाभ ले चुके हैं और अब दूसरी बार किसी अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम के लिए Extraordinary Leave या NOC की मांग कर रहे हैं।

कर्मचारियों के लिए क्या है हाई कोर्ट के फैसले का मतलब?

हाई कोर्ट के इस निर्णय से यह बात स्पष्ट होती है कि केवल किसी उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में प्रवेश परीक्षा पास कर लेना ही कर्मचारी को दोबारा अध्ययन अवकाश, असाधारण अवकाश या NOC पाने का अधिकार नहीं देता। विभाग अपनी प्रशासनिक जरूरतों, लागू नियमों और कर्मचारी द्वारा पहले लिए गए शैक्षणिक लाभ को ध्यान में रखकर फैसला कर सकता है।

 

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