बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी की वेतनवृद्धि बिना संचयी प्रभाव के रोकी गई है, यानी इसका असर उसकी भविष्य की वेतनवृद्धियों पर नहीं पड़ता, तो इसे मामूली सजा माना जाएगा। ऐसी सजा के आधार पर कर्मचारी को पदोन्नति के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।
दरअसल ये पूरा मामला पुलिसकर्मी शेखर सिन्हा से जुड़ा है। वर्ष 1991 में आरक्षक के पद पर पुलिस विभाग में नियुक्त हुए शेखर सिन्हा को वर्ष 2008 में प्रधान आरक्षक के पद पर पदोन्नति मिली थी। वर्ष 2021 में विभागीय कार्रवाई के दौरान उनकी एक वेतनवृद्धि बिना संचयी प्रभाव के रोकने का दंड दिया गया था।
इसके बाद पुलिस विभाग में सहायक उप निरीक्षक यानी ASI पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान शेखर सिन्हा से कनिष्ठ कुछ कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए विचार में शामिल किया गया, लेकिन उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
बिना संचयी प्रभाव की सजा को माना मामूली दंड
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने सजा की प्रकृति और उसके वास्तविक प्रभाव को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा कि संचयी प्रभाव से वेतनवृद्धि रोकना गंभीर दंड की श्रेणी में आ सकता है, लेकिन बिना संचयी प्रभाव के वेतनवृद्धि रोकना मामूली दंड है।
कोर्ट ने माना कि शेखर सिन्हा को दी गई सजा का उनकी भविष्य की वेतनवृद्धियों पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं था। ऐसे में केवल इस दंड के आधार पर उन्हें पदोन्नति की प्रक्रिया से बाहर रखना उचित नहीं था।
विभाग की कार्रवाई को हाईकोर्ट ने गलत माना
मामले में कोर्ट ने संबंधित नियमों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी अवलोकन किया। अदालत ने माना कि शेखर सिन्हा के मामले में 24 अप्रैल 2000 के परिपत्र को जिस तरह लागू किया गया, वह उचित नहीं था।हाईकोर्ट ने कहा कि विभाग को कर्मचारी की सजा की वास्तविक प्रकृति और उसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति के दावे पर विचार करना चाहिए था।
ASI प्रमोशन के दावे पर दोबारा विचार के निर्देश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शेखर सिन्हा की याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों को सहायक उप निरीक्षक (ASI) पद पर उनके प्रमोशन के दावे पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि शेखर सिन्हा पदोन्नति के लिए पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें पदोन्नत पद से जुड़े सभी सेवा लाभ उस तारीख से दिए जाएं, जिस तारीख से उनके कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति मिली थी।
इस फैसले से पुलिस विभाग में पदोन्नति और विभागीय दंड के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हुई है। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि किसी कर्मचारी को दी गई सजा की प्रकृति और उसके वास्तविक प्रभाव को देखे बिना केवल दंडित किए जाने के आधार पर उसे पदोन्नति के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।


















