रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में खेल संस्कृति को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ में सिल्वर मेडल जीतने वाली ज्ञानेश्वरी को DSP बनाने व 30 लाख कैश देने की घोषणा से सरकार खेल प्रतिभाओं को सीधा संकेत दे चुकी है। अब खेल अधोसंरचना को मजबूत करने, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और ग्रामीण-आदिवासी क्षेत्रों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की कवायद में भी सरकार जुट गयी है।
खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
यह जानकारी उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने मंगलवार को रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। इस दौरान विभाग के सचिव यशवंत कुमार और उप संचालक रश्मि ठाकुर भी मौजूद रहे।
राज्य में पहली बार हॉकी लीग की तैयारी
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पहली बार हॉकी लीग आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य स्थानीय खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी मंच उपलब्ध कराना और हॉकी को नई पहचान देना है। साथ ही राज्य की खेल अकादमियों के 14 प्रशिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है, ताकि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग मिल सके।
6 नए जिलों में खेल अधिकारियों की नियुक्ति
खेल गतिविधियों के विस्तार के लिए सरकार ने छह नए जिलों—गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती—में खेल अधिकारी के पद स्वीकृत किए हैं।इसके अलावा विभाग में 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों और 8 वार्डनों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।
4 करोड़ से बढ़कर 304 करोड़ पहुंचा खेल विभाग का बजट
अरुण साव ने कहा कि राज्य गठन के समय खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट केवल 4 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 304 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक बच्चों और युवाओं को खेल मैदानों तक लाना और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बस्तर के बाद अब सरगुजा ओलंपिक
सरकार ने दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का सफल आयोजन किया। अब इसी तर्ज पर सरगुजा ओलंपिक की भी शुरुआत की गई है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा अवसर मिलेगा।
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से बढ़ी पहचान
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की सफल मेजबानी के बाद छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। आने वाले समय में राज्य को खेल प्रतिभाओं का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए कई नई योजनाओं पर काम किया जा रहा है।



















