दुर्ग। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर विवाद अब सड़क से लेकर शिक्षा विभाग के दफ्तर तक पहुंच गया है। पदोन्नति में टीईटी की अचानक अनिवार्यता और वरिष्ठता की अनदेखी के विरोध में दुर्ग संभाग के करीब 500 शिक्षक एकजुट हुए और संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) को ज्ञापन सौंपकर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
शिक्षक साझा मंच का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को पदोन्नति के समय अचानक टीईटी की शर्त के दायरे में लाना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों ने विभाग से पूरे मामले में स्पष्टता लाने और न्यायालयीन निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने की मांग की है।
वर्षों की सेवा के बाद अचानक TET की शर्त क्यों?
शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान में कार्यरत बड़ी संख्या में शिक्षक आरटीई अधिनियम, 2009 लागू होने से पहले या उस समय प्रभावी नियमों के तहत नियुक्त हुए थे। नियुक्ति के वक्त विभाग ने जो शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताएं निर्धारित की थीं, उन्हें शिक्षकों ने पूरा किया था। उस समय टीईटी पदोन्नति के लिए अनिवार्य शर्त नहीं थी।
ऐसे में वर्षों तक सेवा लेने के बाद पदोन्नति के समय अचानक टीईटी प्रमाणपत्र की अनिवार्यता लागू किए जाने से शिक्षकों में असंतोष है।
सुप्रीम कोर्ट की समय-सीमा का हवाला
शिक्षक साझा मंच ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व सेवारत शिक्षकों को आवश्यक अर्हता हासिल करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का अवसर दिया गया है।
शिक्षकों की मांग है कि इस निर्धारित अवधि को ध्यान में रखते हुए उन्हें पदोन्नति से वंचित नहीं किया जाए और टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया जाए।
2017 से 2025 तक बिना TET पदोन्नति का मुद्दा
ज्ञापन में शिक्षकों ने एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उनका कहना है कि 2017 से 2025 के बीच कई सहायक शिक्षकों को बिना टीईटी के पदोन्नति दी गई।
ऐसे में अब अचानक टीईटी को अनिवार्य किए जाने के पीछे विभाग का स्पष्ट नियम, अधिसूचना या कारणयुक्त आदेश क्या है, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। शिक्षकों ने इसी आधार पर वर्तमान पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।
पहले विसंगतियां दूर हों, फिर आगे बढ़े प्रक्रिया
शिक्षक साझा मंच ने मांग की है कि पदोन्नति प्रक्रिया में सामने आई वरिष्ठता और अन्य विभागीय विसंगतियों का पहले निराकरण किया जाए। जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक चल रही पदोन्नति प्रक्रिया को स्थगित किया जाए।
शिक्षकों ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला देते हुए सेवा में समानता और समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।
संयुक्त संचालक ने दिया परीक्षण का भरोसा
शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) के समक्ष अपनी मांगें विस्तार से रखीं। ज्ञापन का संज्ञान लेते हुए संयुक्त संचालक ने मामले का नियमानुसार परीक्षण कराने का आश्वासन दिया।
अब शिक्षकों की निगाहें विभाग के अगले निर्णय पर टिकी हैं।
मनीष मिश्रा से लेकर गिरीश साहू तक, पदाधिकारियों ने संभाली कमान
ज्ञापन सौंपने के दौरान शिक्षक साझा मंच के मनीष मिश्रा, विकास राजपूत, देवेंद्र हरमुख, रमेश साहू और गिरीश साहू सहित दुर्ग संभाग के करीब 500 शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों ने एकजुट होकर पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के स्पष्ट पालन की मांग की।
रवीन्द्र राठौर का दो टूक संदेश- अब मनमानी बर्दाश्त नहीं
शिक्षक साझा मंच के प्रदेश अध्यक्ष रवीन्द्र राठौर ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की ओर से शिक्षकों के हितों का ध्यान रखने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा जिस तरह से फैसले लिए जा रहे हैं, उससे शिक्षकों में नाराजगी है।
राठौर ने कहा कि “सरकार ने शिक्षकों के हित का ख्याल रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन अधिकारी लगातार शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का काम कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के साथ वर्षों की सेवा के बाद इस तरह की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है। विभाग को पूरे मामले में स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए और शिक्षकों के हितों का ध्यान रखना चाहिए।
मांग नहीं मानी तो दफ्तरों में होगा प्रदर्शन
रवीन्द्र राठौर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों ने मनमानी बंद नहीं की और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि “अगर अधिकारियों ने ये मनमानी बंद नहीं की, तो अधिकारियों के दफ्तर में ही प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।”
शिक्षकों के इस विरोध के बाद अब पदोन्नति प्रक्रिया और टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षा विभाग के अगले कदम पर सबकी नजर है।



















