कांकेर। भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी के दौरान डॉक्टर और स्टाफ नर्सों से कथित अभद्रता के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना के विरोध में अब आदिवासी समाज और अजाक्स (AJAKS) संगठन ने भी मोर्चा खोल दिया है। अजाक्स ने स्वास्थ्य मंत्री, एसडीएम और थाना प्रभारी के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि 1 अगस्त को उपसरपंच सहित चार लोगों ने स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और स्टाफ नर्सों के साथ अभद्र व्यवहार किया। इस घटना से स्वास्थ्य कर्मियों में आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
9 अगस्त को उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस घटनाक्रम को लेकर आदिवासी समाज ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो 9 अगस्त, विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा। समाज का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
निलंबन निरस्त करने की भी मांग
ज्ञापन में हाल ही में हुए जच्चा-बच्चा मौत मामले का भी उल्लेख किया गया है। समाज ने इस मामले में निलंबित किए गए डॉ. सविन्द्र गोटा और दोनों स्टाफ नर्सों का निलंबन निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई की जानी चाहिए। दरअसल कुछ दिन पहले ही जच्चा बच्चा मौत मामले में स्वास्थ्य विभाग ने निलंबन की कार्रवाई की थी।
प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
आदिवासी समाज और अजाक्स संगठन ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।



















