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Raipur Commissionerate News: रायपुर जिले में पूरी तरह लागू हो सकती है कमिश्नरी व्यवस्था, DGP की रिपोर्ट के बाद अगस्त में हो सकती है बड़ी घोषणा

रायपुर में कमिश्नरी और ग्रामीण पुलिस की दोहरी व्यवस्था खत्म हो सकती है। DGP की समिति ने एकीकृत व्यवस्था की सिफारिश की है। अगस्त तक पूरे जिले में कमिश्नरी लागू होने की संभावना, 50 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का भी अनुमान।

July 21, 2026 5:19 AM
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Raipur Commissionerate News। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लागू कमिश्नरी और ग्रामीण पुलिस की दोहरी व्यवस्था अब खत्म होने की ओर बढ़ती नजर आ रही है। पहले जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे जिले में एक समान पुलिस व्यवस्था लागू करने की मांग की थी। अब डीजीपी अरुणदेव गौतम की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट के बाद पूरे जिले में एकीकृत कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने की कवायद तेज हो गई है।

इसके पीछे संसाधन का अभाव व कई सारी व्यवहारिक दिक्कतें हैं। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री विजय शर्मा पूरे जिले में कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने के पक्ष में हैं और इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से भी सहमति बन चुकी है। शासन स्तर पर अगस्त 2026 तक इसकी घोषणा की तैयारी चल रही है। हो सकता है 15 अगस्त को इसकी घोषणा मुख्यमंत्री की तरफ से कर दी जाये।

179 दिन में ही सामने आई दोहरी व्यवस्था की कमियां

दरअसल इस वक्त रायपुर जिला दो हिस्सों में बसा है। रायपुर कमिश्नरेट व रायपुर ग्रामीण, इसी व्यवस्था की वजह से दिक्कतें आ रही है। बताया जा रहा है कि कमिश्नरी और रायपुर ग्रामीण पुलिस की अलग-अलग व्यवस्था लागू होने के महज 179 दिनों में कई प्रशासनिक और व्यावहारिक समस्याएं सामने आ गई हैं।

डीजीपी ने इन समस्याओं का उल्लेख करते हुए शासन को पत्र भेजा है।पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित एडीजी स्तर की उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि पर्याप्त पुलिस बल, संसाधन और अधोसंरचना के बिना दोहरी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करना संभव नहीं है।

समिति की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि—

  • दोहरी व्यवस्था से पुलिसिंग की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
  • संसाधनों का अनावश्यक बंटवारा हो रहा है।
  • सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
  • पूरे जिले में एकीकृत पुलिस व्यवस्था (Unified Commissionerate System) लागू करना अधिक व्यावहारिक होगा।

विधानसभा में भी पहुंचा मामला

दोहरी व्यवस्था का असर विधानसभा तक पहुंच चुका है। वरिष्ठ विधायक भोलाराम साहू के प्रश्न के दौरान इस व्यवस्था के कारण गलत जवाब प्रस्तुत होने का मामला सामने आया। इसके बाद उन्होंने गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति दर्ज कराई।

तबादलों में भी आ रही दिक्कत

एक ही जिले में दो अलग पुलिस इकाइयों के कारण कर्मचारियों के तबादले भी जटिल हो गए हैं।

  • सिपाही और हवलदार के स्थानांतरण के लिए भी फाइल डीजीपी स्तर तक भेजनी पड़ रही है।
  • शासन की अनुमति के बिना नवा रायपुर में पदस्थ पुलिसकर्मियों को शहर क्षेत्र में तैनात नहीं किया जा सकता।

वीवीआईपी क्षेत्र भी बने परेशानी की वजह

मौजूदा व्यवस्था में एयरपोर्ट, विधानसभा और मंत्रालय जैसे अत्यंत संवेदनशील वीवीआईपी क्षेत्र रायपुर ग्रामीण पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि ग्रामीण एसपी और आईजी का कार्यालय कमिश्नरेट क्षेत्र में स्थित है।इसके अलावा कई वार्ड और ग्राम पंचायतें भी अधिसूचना के अनुरूप विभाजित नहीं हैं, जिससे प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बन रही है।

समीक्षा रिपोर्ट में पुलिसिंग पर सवाल

पुलिस मुख्यालय की 100 दिनों की समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया है कि—

  • कमिश्नरेट क्षेत्र में अपराधों में कमी आई है और कार्रवाई बेहतर हुई है।
  • वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग कमजोर हुई है और अपराध बढ़ने की प्रवृत्ति देखी गई है।

50 करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त खर्च

यदि मौजूदा दोहरी व्यवस्था जारी रखी जाती है तो सरकार को रायपुर ग्रामीण पुलिस के लिए पूरी तरह अलग आधारभूत ढांचा तैयार करना होगा।प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इसके लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा।इसके तहत अलग से तैयार करने होंगे—

  • एसपी कार्यालय
  • पुलिस लाइन
  • आवासीय क्वार्टर
  • महिला थाना
  • अजाक थाना
  • क्राइम ब्रांच कार्यालय
  • ट्रैफिक पुलिस का ढांचा
  • अतिरिक्त पुलिस बल की भर्ती

अभी तक स्थायी दफ्तर भी नहीं

फिलहाल रायपुर ग्रामीण एसपी संभागीय आयुक्त कार्यालय से अस्थायी रूप से काम कर रही हैं। वहीं तीनों अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों (ASP) के पास भी स्थायी कार्यालय उपलब्ध नहीं है। इसे भी समिति ने गंभीर प्रशासनिक कमी माना है।

अगस्त में हो सकती है बड़ी घोषणा

सूत्रों के अनुसार शासन अब पूरे जिले में एक समान कमिश्नरी व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव पर तेजी से काम कर रहा है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगस्त 2026 में सरकार इस संबंध में बड़ा फैसला घोषित कर सकती है। सब कुछ ठीक रहा, तो 15 अगस्त को मुख्यमंत्री भी इसकी घोषणा कर सकते हैं।

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