धमतरी/सिहावा। शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी पर आज सिहावा स्थित प्रसिद्ध मां शीतला शक्ति पीठ में श्रद्धा और अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही माता के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन कुंड में अर्पित होती आहुतियां और ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। महाष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित विशेष हवन-पूजन एवं पूर्णाहुति में बड़ी संख्या में भक्तों ने शामिल होकर परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
तेरह अध्यायों के बीज मंत्रों से हुआ विशेष हवन।
महाष्टमी के अवसर पर विशेष हवन का शुभारंभ सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजे विधि-विधान के साथ हुआ, जो शाम तक चलता रहा। आचार्य नारायण प्रसाद पाठक के मार्गदर्शन में दुर्गा सप्तशती के सभी तेरह अध्यायों के बीज मंत्रों के साथ यज्ञकुंड में आहुतियां अर्पित की गईं। हवन में विभिन्न प्रकार की औषधीय सामग्रियों से तैयार हवन सामग्री एवं सांखला का उपयोग किया गया।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि श्रद्धालुओं को भी हवन में प्रत्यक्ष सहभागिता का अवसर मिला। प्रथम अध्याय से लेकर तेरहवें अध्याय तक श्रद्धालु बारी-बारी से यज्ञशाला में प्रवेश करते रहे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुति अर्पित कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। हवन के दौरान महिलाओं, पुरुषों और बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
नव कन्याओं और लगरूवा महाराज का विधिवत पूजन।
महाष्टमी के धार्मिक अनुष्ठानों के अंतर्गत रविवार को देवी स्वरूप नव कन्याओं एवं लगरूवा महाराज का विधि-विधान से पूजन किया गया। सर्वप्रथम उनके चरण धोकर सम्मानपूर्वक आसन पर विराजित किया गया। इसके बाद रोली-अक्षत से तिलक-वंदन कर लाल चुनरी ओढ़ाई गई। श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना के पश्चात खीर, पूड़ी, फल एवं अन्य प्रसाद का भोज कराया गया।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन कर मां शीतला से परिवार, समाज और क्षेत्र में सुख-शांति, खुशहाली एवं समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की।
महाआरती और पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ अनुष्ठान।
शाम को विधि-विधानपूर्वक हवन की पूर्णाहुति संपन्न कराई गई। इसके बाद मां शीतला की भव्य महाआरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दीपों की रोशनी, घंटियों की गूंज और माता के जयकारों के बीच पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो गया। महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
श्रद्धालुओं ने मां शीतला के चरणों में शीश नवाकर क्षेत्र में सुख-शांति, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य, अच्छी वर्षा और समृद्धि की कामना की।
‘नवरात्रि आत्मशुद्धि, जप और तप का महापर्व’।
महाष्टमी के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य नारायण प्रसाद पाठक ने कहा कि अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां महागौरी की आराधना से मन को शांति मिलती है तथा जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना, जप और तप का महापर्व है। नौ दिनों तक श्रद्धा और संयम के साथ माता की आराधना करने से मन के नकारात्मक विचारों एवं विकारों को दूर करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर चलने तथा माता की भक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
समिति के पदाधिकारियों ने संभाली आयोजन की कमान।
महाष्टमी के आयोजन को व्यवस्थित एवं सफल बनाने में शीतला शक्ति पीठ समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। समिति के अध्यक्ष नरेंद्र नाग, उपाध्यक्ष बलदेव निषाद एवं रामलाल नेताम, संरक्षक नेम सिंह बिसेन एवं मंशा गौर, सचिव नारद निषाद, सहसचिव बुधेश्वर साहू एवं लालेस्वर साहू, कोषाध्यक्ष गेंदलाल यादव, सलाहकार गगन नाहटा एवं भरत निर्मलकर, ग्राम पटेल राजेश यदु, सांस्कृतिक प्रभारी तुकाराम साहू एवं सहप्रभारी महेंद्र कौशल आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटे रहे।
इसके अलावा निर्माण समिति प्रभारी सचिन भंसाली, पुजारी ज्ञान सागर पटेल एवं परमेश्वर नेताम सहित मेहतर गौर, राजकुमार निषाद, दीपक तंवर, छबि ठाकुर, संजय सारथी, प्रवीण गुप्ता, कुँवर साहू, जग्गू साहू, नरेश पटेल, महेश साहू, ललित निर्मलकर, सुभाष यादव, नोहर साहू, ह्रदय भण्डारी, महेंद्र साहू, अभय नेताम, नवल साहू, दिनेश पटेल, बैजनाथ पटेल, बाल सिंह शोरी, जसपाल कुंजाम, रोहित साहू, शांतिलाल साहू, दीनदयाल गंधर्व, युग सिंह बेस और तेजनाथ शाण्डिल्य सहित अन्य सदस्यों ने व्यवस्थाओं में सहयोग दिया।










