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Chhattisgarh High Court: पुलिस पदोन्नति विवाद पर हाई कोर्ट का आदेश, DGP को अभ्यावेदन पर जल्द फैसला करने के निर्देश

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पुलिस मुख्यालय के पदोन्नति और आरक्षण रोस्टर विवाद में याचिकाकर्ताओं को DGP के समक्ष अभ्यावेदन देने की अनुमति दी। कोर्ट ने DGP को जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए।

July 21, 2026 4:43 AM
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बिलासपुर। पुलिस मुख्यालय में पदोन्नति और आरक्षण रोस्टर से जुड़े विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवायी हुई। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद में इस मामले में डीजीपी को महत्वपूर्ण आदेश दिये हैं। कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता पुलिस अधिकारियों को अपनी शिकायतों के संबंध में पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। साथ ही निर्देश दिया है कि अभ्यावेदन मिलने पर डीजीपी कानून के अनुसार जल्द निर्णय लें।यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने सुनाया।

इन पुलिस अधिकारियों ने दायर की थी याचिका

याचिका पुलिस मुख्यालय की जनरल ब्रांच में पदस्थ—

  • मोहन ध्रुव
  • अजय कुमार गायकवाड़
  • ओम कुमारी बेहरा
  • प्रदीप एक्का
  • समीर कुमार कुर्रे द्वारा दायर की गई थी।

पदोन्नति के संदर्भ में याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वर्ष 2019 में सब इंस्पेक्टर (एम) से इंस्पेक्टर (एम) और एएसआई (एम) से सब इंस्पेक्टर (एम) के पदों पर पदोन्नति के दौरान आरक्षण रोस्टर का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। जो प्रमोशन हुआ है, वो नियमानुसार नहीं है।

आरक्षण रोस्टर अपडेट कर पदोन्नति की मांग

याचिका में कहा गया कि संशोधित आरक्षण रोस्टर के अनुसार उन्हें पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए था। उन्होंने अदालत से मांग की कि—

  • पहले आरक्षण रोस्टर को अद्यतन किया जाए।
  • उसके बाद पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाए।
  • आवश्यकता होने पर पहले हुई पदोन्नतियों की भी समीक्षा की जाए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता एस.बी. पांडेय ने दलील दी कि फिलहाल उन्हें विस्तृत अभ्यावेदन देने की अनुमति दी जाए और डीजीपी को उस पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।वहीं, राज्य शासन की ओर से पैनल अधिवक्ता विवेक एस. ओझा ने याचिका का विरोध किया।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाई कोर्ट ने याचिका का अंतिम निराकरण करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपनी सभी शिकायतों और दावों के संबंध में पुलिस महानिदेशक के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाता है, तो पुलिस महानिदेशक उस पर विधि के अनुसार यथाशीघ्र विचार कर निर्णय लें।हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी नहीं की है। डीजीपी स्वतंत्र रूप से उपलब्ध तथ्यों और कानून के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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