रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर छत्तीसगढ की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के विरोध और बिजली बिल बढ़ने के आरोपों के बीच क्रेडा (CREDA) के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी ने कांग्रेस पर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पारदर्शी और आधुनिक बिजली व्यवस्था उपलब्ध कराने का माध्यम है और जिस योजना का आज कांग्रेस विरोध कर रही है, उसकी शुरुआत और टेंडर प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही पूरी हुई थी।
कांग्रेस सरकार में मिली थी परियोजना को मंजूरी
भूपेंद्र सवन्नी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 20 जुलाई 2021 को रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत स्मार्ट मीटर योजना शुरू की थी। छत्तीसगढ़ में इस परियोजना की डीपीआर 13 जुलाई 2022 को मंजूर हुई और 22 सितंबर 2022 को टेंडर जारी किए गए। जून 2023 में अंबिकापुर, बिलासपुर, रायगढ़ और रायपुर क्षेत्रों के लिए एजेंसियों का चयन किया गया, जबकि अक्टूबर 2023 में दुर्ग, राजनांदगांव और जगदलपुर क्षेत्रों के लिए भी कंपनियां नियुक्त की गईं।उन्होंने कहा कि आज जिस योजना का कांग्रेस विरोध कर रही है, उसी को उसके शासनकाल में आगे बढ़ाया गया था।
केरल, झारखंड और हिमाचल में भी लग रहे स्मार्ट मीटर
भूपेंद्र सवन्नी ने कहा कि केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और यूपीए शासित राज्यों केरल, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में भी स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। कर्नाटक में भी यह व्यवस्था लागू की जा रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में इसका विरोध केवल राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है।
स्मार्ट मीटर से नहीं, ज्यादा खपत से बढ़ा बिल
बिजली बिल बढ़ने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अप्रैल, मई और जून में भीषण गर्मी के कारण एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग बढ़ा, जिससे बिजली खपत अधिक हुई। अधिक खपत होने पर उपभोक्ता ऊंचे टैरिफ स्लैब में पहुंच जाते हैं और बिल बढ़ जाता है। इसका स्मार्ट मीटर से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि ‘मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत अभियान’ के तहत 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक आधे बिल की छूट मिलती है। यदि खपत 400 यूनिट से अधिक हो जाती है तो यह छूट स्वतः समाप्त हो जाती है, जिससे बिल अधिक दिखाई देता है।
मीटर की जांच की सुविधा उपलब्ध
क्रेडा अध्यक्ष ने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर की रीडिंग पर संदेह है तो चेक मीटर लगवाने की सुविधा उपलब्ध है। अब तक हुई जांच में पुराने और स्मार्ट मीटर की रीडिंग में कोई अंतर नहीं पाया गया है।
‘मोर बिजली’ ऐप से हर 30 मिनट में देखें खपत
उन्होंने उपभोक्ताओं से ‘मोर बिजली’ ऐप का उपयोग करने की अपील की। इस ऐप के माध्यम से हर 30 मिनट में बिजली की खपत देखी जा सकती है, जिससे उपभोक्ता अपनी बिजली खपत नियंत्रित कर सकते हैं और 400 यूनिट की सीमा में रहकर हाफ बिजली योजना का लाभ उठा सकते हैं। किसी भी शिकायत के लिए 1912 टोल-फ्री नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।
सोलर ऊर्जा अपनाने की भी अपील
भूपेंद्र सवन्नी ने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि बिजली बिल कम करने का सबसे प्रभावी उपाय रूफटॉप सोलर है। योजना के तहत 1 किलोवाट पर 45 हजार, 2 किलोवाट पर 90 हजार और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर केंद्र और राज्य सरकार मिलाकर 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1.87 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और 80 हजार से अधिक घरों में सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं, जिससे हजारों परिवारों का बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है।










