बिलासपुर। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सख्त रुख के बाद शिक्षकों में हड़कंप है। डीपीआई के कड़े आदेश का ही असर है कि वर्षों से विभिन्न कार्यालयों में अटैच होकर बैठे शिक्षक और शिक्षा विभाग के कर्मचारी अब अपने मूल पदस्थापना स्थल लौटने लगे हैं। बिलासपुर जिला निर्वाचन कार्यालय से जारी आदेश में निर्वाचन कार्य में संलग्न शिक्षा विभाग के नौ कर्मचारियों को उनके मूल कार्यालयों के लिए भारमुक्त (रिलीव) कर दिया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब डीपीआई ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए सभी गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को तत्काल स्कूलों और मूल कार्यालयों में वापस भेजने के निर्देश दिए हैं।

तीन साल पहले खत्म हो चुका चुनाव, फिर भी जमे रहे कर्मचारी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सामान्य निर्वाचन का कार्य वर्षों पहले समाप्त हो चुका था, इसके बावजूद कई शिक्षक और कर्मचारी अब तक निर्वाचन कार्यालयों में ही पदस्थ रहे। लंबे समय से अटैचमेंट के नाम पर कार्यालयों में जमे इन कर्मचारियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे, लेकिन हर बार आदेश जारी होने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता था।इसी ढिलाई का फायदा उठाकर कई शिक्षक और कर्मचारी वर्षों तक स्कूलों से दूर कार्यालयों में ही काम करते रहे।
बिलासपुर से जारी आदेश में 9 कर्मचारी रिलीव
20 जुलाई 2026 को कार्यालय कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, बिलासपुर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों के पालन में निर्वाचन कार्यालय में संलग्न शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना और आहरण-संवितरण कार्यालयों के लिए तत्काल प्रभाव से भारमुक्त कर दिया गया है।आदेश में सहायक ग्रेड-2, सहायक ग्रेड-3, शिक्षक और भृत्य सहित कुल 9 कर्मचारियों को रिलीव किए जाने का उल्लेख है।
VSK ऐप से नहीं बनाई उपस्थिति तो रुकेगा वेतन
डीपीआई ने इस बार केवल आदेश जारी कर औपचारिकता पूरी नहीं की है, बल्कि कड़ी चेतावनी भी दी है। विभाग ने कहा है कि यदि रिलीव होने के बाद संबंधित शिक्षक अपने मूल स्कूल में जाकर VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कराते हैं तो जुलाई माह का वेतन रोक दिया जाएगा। इतना ही नहीं, लगातार अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ ब्रेक इन सर्विस जैसी कठोर कार्रवाई भी की जाएगी।
इस बार नहीं चलेगी पुरानी व्यवस्था
शिक्षा विभाग में वर्षों से यह देखा जाता रहा है कि अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश तो जारी होते थे, लेकिन उनका पालन नहीं होता था। प्रभावशाली कर्मचारी किसी न किसी कारण से फिर कार्यालयों में बने रहते थे।हालांकि इस बार डीपीआई का रुख पहले से कहीं अधिक सख्त माना जा रहा है। विभाग लगातार जिलों से अनुपालन रिपोर्ट मांग रहा है, जिसके चलते अलग-अलग जिलों से कर्मचारियों को रिलीव करने के आदेश जारी होने लगे हैं। जानकार बताते हैं कि कई ऐसे शिक्षक हैं जो 10-15 साल से स्कूल गये ही नहीं, उन्हें भी इस बार स्कूल लौटना पड़ रहा है।
आने वाले दिनों में और भी आदेश संभव
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई केवल बिलासपुर तक सीमित नहीं रहेगी। जिन जिलों में शिक्षक और कर्मचारी अब भी गैर-शैक्षणिक कार्यालयों में संलग्न हैं, वहां भी इसी तरह के आदेश जारी किए जा सकते हैं। विभाग का उद्देश्य नए शैक्षणिक सत्र में अधिक से अधिक शिक्षकों की स्कूलों में उपलब्धता सुनिश्चित करना है।DPI की सख्ती: बिलासपुर निर्वाचन कार्यालय से वर्षों से अटैच 9 शिक्षक-कर्मचारी रिलीव, VSK ऐप से अटेंडेंस नहीं तो रुकेगा वेतन










