धमतरी। आसमान से आज लगातार बारिश की बूंदें गिर रही थीं, लेकिन वहां मौजूद हर आंख से बह रहे आंसू उस बारिश से कहीं ज्यादा भारी थे। मानों प्रकृति भी अपने वीर सपूत को अंतिम सलामी देने के लिए बरस रही हो। हाथों में तिरंगा, आंखों में गर्व और दिल में अपार पीड़ा लिए सैकड़ों ग्रामीण एक स्वर में नारे लगा रहे थे—”जब तक सूरज चांद रहेगा, खिलेश भैया का नाम रहेगा…” यह दृश्य धमतरी जिले के शंकरदाह गांव का था, जहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान खिलेश ध्रुव (32 वर्ष) को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। देश की सेवा में समर्पित इस जवान के निधन ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया।
10 वर्षों तक देश सेवा को समर्पित रहा जीवन
धमतरी जिले के शंकरदाह निवासी खिलेश ध्रुव पिछले करीब 10 वर्षों से आईटीबीपी में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वे नक्सल प्रभावित नारायणपुर ऑपरेशन में तैनात थे और हाल ही में उनका तबादला गुवाहाटी हुआ था।बताया गया कि गुवाहाटी के लिए रवाना होने के दौरान रास्ते में उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उपचार मिलने से पहले ही उनका निधन हो गया। उनके निधन के कारणों को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
एक परिवार का सहारा छूटा, लेकिन देश को मिला अमर सपूत
खिलेश ध्रुव अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बच्चों—एक बेटे और एक बेटी—को छोड़ गए हैं। जिन नन्हें हाथों ने पिता की उंगली थामकर चलना सीखा था, अब उन्हें पिता की यादों के सहारे जीवन का सफर तय करना होगा।परिवार के आंसू हर किसी की आंखें नम कर रहे थे, लेकिन उन आंसुओं के बीच इस बात का गर्व भी साफ दिखाई दे रहा था कि उनका बेटा देश की वर्दी पहनकर मातृभूमि की सेवा करता रहा।
तिरंगे में लिपटा बेटा जब गांव पहुंचा… पूरा इलाका रो पड़ा
जैसे ही तिरंगे में लिपटा खिलेश ध्रुव का पार्थिव शरीर शंकरदाह गांव पहुंचा, पूरा गांव सड़कों पर उमड़ पड़ा। बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे… हर कोई अपने वीर बेटे के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा। वातावरण भारत माता के जयकारों और अमर शहीद के नारों से गूंज उठा।आईटीबीपी के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

बारिश भी जैसे श्रद्धांजलि बनकर बरसी
अंतिम यात्रा के दौरान लगातार हो रही बारिश ने उस पल को और अधिक भावुक बना दिया। ऐसा लग रहा था मानो आसमान भी अपने वीर सपूत की विदाई पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हो। बारिश के बीच भी लोगों के कदम नहीं रुके। हर कोई अंतिम यात्रा में शामिल होकर अपने नायक को आखिरी सलाम देना चाहता था।
गांव का गौरव, देश का वीर
खिलेश ध्रुव अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और देशभक्ति हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि देश की रक्षा करने वाले जवान केवल अपने परिवार के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के बेटे होते हैं।धमतरी ने अपना एक लाल खोया है, लेकिन भारत ने एक ऐसा वीर सपूत पाया है, जिसका नाम हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।
वीर जवान खिलेश ध्रुव को शत-शत नमन।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।










