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India First Hydrogen Train: जानिये क्या है हाइड्रोजन ट्रेन, ना धुआं, ना प्रदूषण, सिर्फ निकलता भांप, 3200 लीटर डीजल की बचत, जानिए कैसे करती है काम

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने 1200 किलोमीटर से अधिक का सफल सफर पूरा कर लिया है। जानिए यह ट्रेन कैसे काम करती है, इसकी खासियत क्या है और इससे पर्यावरण को कैसे फायदा होगा।

July 29, 2026 12:56 PM
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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और आधुनिक परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल संचालन शुरू कर दिया है। 17 जुलाई 2026 को दिल्ली मंडल के जींद–सोनीपत रेलखंड पर इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था।

महज कुछ दिनों में यह ट्रेन 1,200 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय कर चुकी है और इस दौरान 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत भी हुई है। लोगों के मन में इस बात को लेकर कौतूहल है कि आखिर हाइड्रोजन ट्रेन कैसी होती है, उसका परिचालन कैसे होता है। तो चलिये आपको हम बताते हैं इस ट्रेन की खास बातें…

कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन?

यह ट्रेन डीजल या बिजली की बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलती है। ट्रेन के अंदर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होती है, जिससे ट्रेन को ऊर्जा मिलती है। इस पूरी प्रक्रिया में धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, बल्कि केवल जलवाष्प (Water Vapour) उत्सर्जित होती है। यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे पर्यावरण अनुकूल रेल तकनीकों में गिना जा रहा है।

पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार

भारतीय रेलवे की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। 10 कोच वाली इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन पावर कार लगाई गई हैं, जो मिलकर 2,400 किलोवाट की क्षमता से ट्रेन को संचालित करती हैं। इसके अलावा ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियां और हाइड्रोजन सिलेंडर भी लगाए गए हैं।

जींद में बना पहला हाइड्रोजन स्टेशन

इस परियोजना के तहत हरियाणा के जींद में भारतीय रेलवे का पहला समर्पित हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाया गया है। यहां 500 बार दबाव पर ग्रीन हाइड्रोजन का भंडारण और 350 बार दबाव पर ट्रेन में ईंधन भरने की व्यवस्था की गई है। इस स्टेशन में करीब 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन संग्रहित की जा सकती है।

सुरक्षा के लिए हाईटेक सिस्टम

ट्रेन में सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इसमें हाइड्रोजन रिसाव, आग, धुआं और अधिक तापमान का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। किसी भी खतरे की स्थिति में ऑटोमैटिक शटडाउन सिस्टम सक्रिय हो जाता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप सभी जरूरी परीक्षण भी पूरे किए गए हैं।

जल्द दूसरे रूटों पर भी दौड़ेगी

जींद–सोनीपत रेलखंड पर सफल परीक्षण के बाद भारतीय रेलवे जल्द ही इस हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन दिल्ली के अन्य रेल मार्गों पर भी शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यदि यह परियोजना पूरी तरह सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में देश के कई अन्य रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें देखने को मिल सकती हैं।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भविष्य के स्वच्छ परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं। इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और भारत को नेट जीरो उत्सर्जन (Net Zero Emission) के लक्ष्य तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी।

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