रायपुर/रांची। देश के नक्सल विरोधी अभियान में एक के बाद एक दो बड़ी सफलताओं ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। एक तरफ झारखंड में सुरक्षा बलों ने भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और दो करोड़ रुपये से अधिक के इनामी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर को गिरफ्तार कर लिया, वहीं दूसरी ओर उसकी गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद 49 लाख रुपये के इनामी 8 माओवादी कैडरों ने बीजापुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवादी संगठन के लिए अब तक के सबसे बड़े झटकों में से एक मान रही हैं।
55 जवानों की शहादत से जुड़ा था नाम, आखिरकार गिरफ्तार हुआ मिसिर बेसरा
करीब चार दशक तक माओवादी संगठन की रणनीति तैयार करने वाला मिसिर बेसरा झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सक्रिय था। वह माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो का सदस्य और ईआरबी (ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो) का प्रभारी माना जाता था।सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार उसके खिलाफ हत्या, आईईडी विस्फोट, पुलिस पर हमले और हथियार कानून सहित 100 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं।
मिसिर बेसरा का नाम विशेष रूप से 2003-04 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा क्षेत्र में हुए आईईडी ब्लास्ट से जुड़ा रहा, जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। इसके अलावा 2009 के लखीसराय कोर्ट हमले सहित कई बड़े नक्सली ऑपरेशनों का मास्टरमाइंड भी उसे माना जाता है।झारखंड पुलिस ने उसे दो साथियों के साथ घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई को केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
गिरफ्तारी के बाद संगठन में बढ़ी बेचैनी, 8 इनामी नक्सलियों ने डाले हथियार
मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के कुछ ही समय बाद झारखंड में सक्रिय आठ माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए बीजापुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।इन सभी पर कुल 49 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में पांच महिला माओवादी भी शामिल हैं।
इन कैडरों ने बताया कि सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव, संगठन की कमजोर होती स्थिति, हिंसक विचारधारा से मोहभंग और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
सरेंडर करने वालों में मिसिर बेसरा का सुरक्षा गार्ड भी शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे अहम नाम सलमी चम्पिया उर्फ जिलानी का है, जो मिसिर बेसरा के सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रही थी। उसके अलावा दक्षिण जोनल कमेटी और कोल्हान एरिया कमेटी के कई सक्रिय सदस्य भी मुख्यधारा में लौट आए हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख कैडरों में अश्विन उर्फ लच्छू, रंगा उर्फ सोहन, दोबा माड़वी उर्फ राहत, फगनी पोयम उर्फ रजनी, सूरज मुन्नी चम्पिया उर्फ सुबनी, हिड़मे कड़ती उर्फ रीता, बुधरी कुंजाम उर्फ अनुषा और सलमी चम्पिया उर्फ जिलानी शामिल हैं।
बस्तर में फैलाया था माओवादी नेटवर्क
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मिसिर बेसरा ने बस्तर, सारंडा, कोल्हान, पारसनाथ और ओडिशा के जंगलों में माओवादी नेटवर्क खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई थी। वह संगठन के सैन्य ढांचे और रणनीतिक फैसलों का प्रमुख चेहरा था।विशेषज्ञों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से पूर्वी भारत में माओवादी संगठन की कमान और संचालन क्षमता को बड़ा झटका लगेगा।
पुनर्वास नीति का दिखा असर
बीजापुर पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे सम्मानपूर्वक सामान्य जीवन जी सकें।पुलिस का कहना है कि झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और बीजापुर पुलिस के बीच बेहतर समन्वय तथा पुनर्वास नीति के प्रभाव के कारण यह सफलता मिली है।
नक्सल अभियान में निर्णायक मोड़
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी और आठ इनामी माओवादियों के आत्मसमर्पण ने यह संकेत दिया है कि माओवादी संगठन का ढांचा लगातार कमजोर हो रहा है। लगातार चल रहे ऑपरेशन और पुनर्वास नीति के कारण अब कई सक्रिय कैडर भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने लगे हैं।



















