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TET को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षकों को राहत देने की तैयारी में, सरकार ने शुरू की विकल्पों पर कवायद, ब्रिज कोर्स को माना जा रहा पहली कड़ी, जानिए सरकार का प्लान

छत्तीसगढ़ में TET को लेकर परेशान शिक्षकों को राहत देने के लिए सरकार विकल्पों पर विचार कर रही है। SCERT की ब्रिज कोर्स बैठक में शिक्षक संगठनों ने कई सुझाव दिए।

August 19, 2026 12:07 PM
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रायपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर परेशान चल रहे छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। पिछले दो दिनों में सरकार के रुख में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा की DPI और स्कूल शिक्षा सचिव से मुलाकात के बाद शिक्षकों के TET से जुड़े मुद्दे पर शासन स्तर पर चर्चा तेज हुई है। बुधवार को SCERT में आयोजित बीएड ब्रिज कोर्स की बैठक को भी इसी दिशा में सरकार की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

शिक्षक संगठनों का मानना है कि सरकार TET की

अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों को राहत देने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी तक TET की अनिवार्यता खत्म करने या इसमें औपचारिक छूट देने का कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

संघर्ष मोर्चा की मुलाकात के बाद सक्रिय हुआ शासन

बताया गया कि शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने एक दिन पहले संचालनालय और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की समस्याओं से अवगत कराया था। संगठन ने TET की अनिवार्यता से शिक्षकों के सामने पैदा हुई परिस्थितियों और संभावित समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा।

शिक्षक संगठन के मुताबिक, अधिकारियों ने उनकी भावनाओं और मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वस्त किया कि शिक्षकों को राहत देने के लिए शासन स्तर पर हर संभव विकल्प पर विचार किया जाएगा।

इसके बाद SCERT में बीएड-डीएलएड ब्रिज कोर्स को लेकर बैठक आयोजित की गई। इसे TET से जुड़े संकट के समाधान की दिशा में सरकार की शुरुआती पहल माना जा रहा है।

TET को लेकर कई राज्यों के मॉडल पर मंथन

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। खासकर सरकार उन रास्तों पर विचार कर रहा है, जिससे न्यायपालिका से टकराव की स्थिति न बने। जानकारी के अनुसार, सरकार TET के मुद्दे पर किसी एक विकल्प तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग संभावनाओं पर विचार कर रही है। सचिव और DPI स्तर पर मध्यप्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की व्यवस्था को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है।

उद्देश्य यह तलाशना बताया जा रहा है कि आने वाले वर्षों में शिक्षकों को TET की अनिवार्यता के कारण किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और उन्हें आवश्यक योग्यता हासिल करने का व्यवहारिक रास्ता उपलब्ध कराया जा सके। अधिकारी से पूछे जाने पर कि, क्या ब्रिज कोर्स उसी राहत की पहली कड़ी है, जवाब में अधिकारी ने बताया कि, निश्चित ही,  अभी की परिस्थिति में जब सरकार ब्रिज कोर्स की बात कर रही है, तो ये एक विकल्प जरूर है।

TET में राहत नहीं मिली तो ब्रिज कोर्स विकल्प

शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक विभागीय स्तर पर चर्चा  ये भी है कि यदि किसी परिस्थिति में सरकार TET की अनिवार्यता में शिथिलता नहीं ला पाती है, तो ब्रिज कोर्स के जरिए शिक्षकों को आवश्यक योग्यता दिलाने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि सरकार का एक संभावित प्रयास यह हो सकता है कि बड़ी संख्या में प्रभावित शिक्षकों को पहले बीएड की आवश्यक योग्यता दिलाई जाए और इसके बाद उन्हें TET की तैयारी एवं परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए राज्य स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जाए।
हालांकि, यह फिलहाल विचार-विमर्श का विषय है और सरकार की ओर से इस संबंध में अंतिम निर्णय या आधिकारिक रोडमैप जारी नहीं किया गया है।

SCERT की बैठक में आधा दर्जन से ज्यादा संगठन शामिल

SCERT में आयोजित बैठक में आधा दर्जन से अधिक शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में बीएड-डीएलएड ब्रिज कोर्स के स्वरूप और इसे शिक्षकों के लिए किस तरह सुविधाजनक बनाया जा सकता है, इस पर सुझाव मांगे गए।
शिक्षक संगठनों ने मांग रखी कि ब्रिज कोर्स में प्रवेश देते समय शिक्षकों की वरिष्ठता को आधार बनाया जाए। इसके अलावा ओपन यूनिवर्सिटी से जोड़कर बीएड की डिग्री उपलब्ध कराने का विकल्प भी सुझाया गया।

निशुल्क ब्रिज कोर्स समेत कई सुझाव

बैठक में शिक्षक संगठनों ने ब्रिज कोर्स की न्यूनतम योग्यता स्नातक रखने, शिक्षकों को विभागीय स्तर पर आवश्यक सहयोग देने और कोर्स को निशुल्क कराने की मांग भी रखी।
शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे उनकी नौकरी प्रभावित न हो और वे आसानी से आवश्यक योग्यता हासिल कर सकें।

फिलहाल SCERT की बैठक में आए सुझावों को शासन स्तर पर पहुंचाने की बात कही गई है। ऐसे में अब शिक्षकों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि शासन की ओर से ब्रिज कोर्स और TET को लेकर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है, तो इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

Gitendra Sahu

Gitendra Kumar Sahu has over 10 years of experience in journalism and newsroom operations. He has worked with reputed media organizations such as Swaraj Express and Press Trust of India (PTI), where he spent nearly five years in active journalism. He has also worked with several digital media platforms and possesses extensive experience in both field reporting and newsroom desk operations. After completing his graduation, he chose journalism as his professional career. He specializes in political reporting, current affairs, and crime journalism, with strong expertise in breaking and handling major news stories.

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