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स्कूल में शिक्षक, छुट्टी के बाद ‘डॉक्टर’! सरकारी टीचर के दो-दो क्लीनिकों पर छापा, पत्नी के साथ मिलकर चला रहा था क्लिनिक

बलरामपुर के दामोदरपुर में सरकारी शिक्षक के कथित दो अवैध क्लीनिकों पर संयुक्त टीम ने छापा मारा। एक्सपायरी दवाइयां और मेडिकल उपकरण जब्त किए गए।

August 24, 2026 11:49 AM
शिक्षक चला रहा था फर्जी नर्सिंग होम, छापेमारी के बाद मचा हड़कंप
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School Teacher News: सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी और छुट्टी के बाद मरीजों का इलाज—बलरामपुर जिले में एक सरकारी शिक्षक को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पूर्व माध्यमिक शाला लुरघुट्टा में पदस्थ शिक्षक प्रदीप दास स्कूल की ड्यूटी खत्म करने के बाद दामोदरपुर में मरीजों का इलाज करते थे।

इतना ही नहीं, वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर कथित तौर पर दो क्लीनिक भी संचालित कर रहे थे।अवैध क्लीनिकों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने दामोदरपुर में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान क्लीनिक से एक्सपायरी दवाइयां, मेडिकल उपकरण और अन्य सामग्री बरामद होने की बात सामने आई है।

अचानक पहुंची टीम तो खुली ‘क्लीनिक’ की पोल

दामोदरपुर में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों की जांच के लिए संयुक्त टीम पहुंची थी। टीम ने अलग-अलग बिंदुओं पर जांच शुरू की तो एक क्लीनिक का संबंध सरकारी स्कूल के शिक्षक प्रदीप दास से होने की जानकारी सामने आई।

बताया जा रहा है कि प्रदीप दास दिन में स्कूल में बच्चों को पढ़ाते थे और स्कूल की छुट्टी के बाद कथित तौर पर मरीजों का इलाज करते थे। आरोप है कि उनकी पत्नी के साथ मिलकर दो स्थानों पर क्लीनिक चलाए जा रहे थे।

हालांकि, शिक्षक के पास मरीजों के इलाज के लिए आवश्यक वैध अनुमति या संबंधित दस्तावेज थे या नहीं, इसकी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

क्लीनिक से मिली एक्सपायरी दवाइयां

छापेमारी के दौरान टीम को क्लीनिक से एक्सपायरी दवाइयां, विभिन्न प्रकार के मेडिकल इंस्ट्रूमेंट और अन्य चिकित्सा सामग्री मिली। क्लीनिक संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी टीम के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

इसके बाद अधिकारियों ने मौके से बरामद सामग्री को सीलबंद कर जब्ती की कार्रवाई की। प्रशासन की ओर से नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन को लेकर भी कार्रवाई की गई है।

अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में क्लीनिक संचालन, दवाइयों की वैधता और मरीजों के इलाज से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

मासूम की मौत के बाद झोलाछाप डॉक्टरों पर शिकंजा

बलरामपुर जिले में अवैध क्लीनिकों के खिलाफ प्रशासन का अभियान उस घटना के बाद और तेज हुआ, जिसमें कथित तौर पर झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज के बाद तीन साल के मासूम की मौत हो गई थी।

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने बिना अनुमति क्लीनिक चलाने और मरीजों का इलाज करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इसी अभियान के तहत दामोदरपुर में हुई छापेमारी के दौरान सरकारी शिक्षक के कथित तौर पर क्लीनिक संचालित करने का मामला सामने आया।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर

फिलहाल प्रशासन ने बरामद सामग्री को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि क्लीनिक किसके नाम पर संचालित हो रहे थे, वहां किस तरह मरीजों का इलाज किया जाता था और संबंधित लोगों के पास आवश्यक अनुमति या पंजीयन था या नहीं।

सरकारी शिक्षक के खिलाफ भी विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

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