Koteshwar Mahadev : सावन मास अब अंतिम पड़ाव पर है। इस पूरे माह शिव के अलौलिक रूपों का दर्शन भक्तों ने किया है। आज एक ऐसे ही शिवधाम का हम आपको दर्शन कराने जा रहे हैं। इस शिवधाम को छत्तीसगढ़ में कोटेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। कोटेश्वर महादेव का स्वयंभू शिवलिंग सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं देश दुनिया के भक्तों के लिए भी रहस्यमयी बना हुआ है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा-नगरी वनांचल क्षेत्र में घने जंगलों के बीच स्थित प्राचीन कोटेश्वर धाम में इन दिनों आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है।
धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर कोटाभर्री के घने जंगलों के बीच भगवान कोटेश्वर महादेव का यह प्राचीन धाम स्थित है। सावन के महीने में यहां मेले जैसा माहौल रहता है। धमतरी ही नहीं, बल्कि बस्तर, ओडिशा सहित प्रदेश के कई जिलों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
कोटेश्वर धाम को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान कोटेश्वर महादेव का दूध से अभिषेक करने पर दूध का रंग नीला पड़ जाता है। वहीं मंदिर परिसर में नाग-नागिन के वास की भी मान्यता है। इसी आस्था के चलते श्रद्धालु यहां दूध अर्पित कर उस स्थान की पूजा करते हैं।
सावन के अंतिम सोमवार के मौके पर पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ विधायक अमर अग्रवाल और कांकेर लोकसभा के पूर्व सांसद मोहन मंडावी भी कोटेश्वर महादेव के दर्शन के लिए पहुंचे। दोनों ने भगवान का पूजन-अभिषेक कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
सावन के अंतिम सोमवार पर कोटेश्वर धाम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। हालांकि आस्था के इस केंद्र तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को मुश्किल रास्ते से गुजरना पड़ता है।
धमतरी-नगरी मुख्य मार्ग से करीब 5 किलोमीटर अंदर स्थित मंदिर तक पहुंचने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर है। वहीं दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रात्रि विश्राम की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन से जर्जर सड़क की मरम्मत कराने और श्रद्धालुओं के लिए रात्रि विश्राम भवन निर्माण की मांग की है। समिति का कहना है कि सुविधाएं बेहतर होने से इस प्राचीन शिवधाम में आने वाले श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी।



















