दुर्ग। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के आंदोलन को लेकर 27 अगस्त से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दो सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन की तैयारी कर रहे शिक्षक साझा मंच के प्रतिनिधियों को अब शिक्षा मंत्री से मुलाकात का बुलावा मिला है। मंत्री के पीए अंकित चौहान ने मंच के प्रतिनिधियों को फोन कर 26 अगस्त को दोपहर 1 बजे बैठक के लिए आमंत्रित किया है।
शिक्षकों की प्रस्तावित हड़ताल और दुर्ग-जशपुर में आंदोलन की तैयारियों के बीच सरकार की ओर से आया यह बुलावा अहम माना जा रहा है। हालांकि शिक्षक साझा मंच ने साफ कर दिया है कि केवल बातचीत के लिए बुलाया जाना आंदोलन खत्म करने का आधार नहीं होगा। मांगों पर ठोस निर्णय होने तक 27 अगस्त के आंदोलन की तैयारियां जारी रहेंगी।
वार्ता के लिए क्यों तैयार हुई सरकार-पढ़िये इनसाइट स्टोरी
हकीकत यही है कि शिक्षकों के भड़के आक्रोश ने ही शिक्षा मंत्री को चर्चा के लिए बुलावा भेजने को मजबूर कर दिया। कल यानि 27 अगस्त से शिक्षक साझा मंच कीअनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होनी थी। दुर्ग-जशपुर में शिक्षकों की मोर्चाबंदी तय हो गयी थी। दुर्ग में प्रदर्शन को लेकर डेलीगेशन से जो पुलिस-प्रशासन की वार्ता हुई, उसमें भी शिक्षकों ने स्पष्ट कर दिया था, जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जायेगी, तब तक वो शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर से उठने वाले नहीं है।
शिक्षक साझा मंच की दो सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन को उग्र करने की पूरी रणनीति तैयार हो गयी थी। दुर्ग-भिलाई जिला प्रशासन की ओर से मंच के प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए बुलाया गया। बैठक में एडीएम साहब एवं पुलिस कमिश्नर के अलावा शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि ने शिक्षक साझा मंच के प्रतिनिधियों से आंदोलन और मांगों को लेकर चर्चा की। बैठक के दौरान एडीएम ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि अगले दिन शिक्षक साझा मंच के डेलिगेशन की शत-प्रतिशत शिक्षा मंत्री से वार्ता कराया जाएगा और आप उनसे मिलकर अपनी सारी बात रखे।
27 अगस्त से होने वाली थी अनिश्चितकालीन हड़ताल
शिक्षक साझा मंच ने अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर 27 अगस्त से अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया था। इसके तहत दुर्ग और जशपुर में शिक्षकों की बड़ी संख्या में जुटने की तैयारी थी।दुर्ग में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर शिक्षक प्रतिनिधियों और पुलिस-प्रशासन के बीच भी चर्चा हुई। मंच के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के सामने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा था कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकलता, तब तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।शिक्षकों की रणनीति शिक्षा मंत्री के निवास के बाहर प्रदर्शन करने की थी। इसी बीच प्रशासन की ओर से आंदोलनकारी प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया गया।
ADM और पुलिस कमिश्नर के साथ हुई बैठक
इससे पहले मंगलवार को दुर्ग-भिलाई जिला प्रशासन की ओर से शिक्षक साझा मंच के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की गई। इसमें एडीएम, पुलिस कमिश्नर और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि मौजूद रहे।बैठक में शिक्षकों की मांगों और प्रस्तावित आंदोलन को लेकर चर्चा हुई। प्रशासन की ओर से प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया गया कि शिक्षक साझा मंच के डेलीगेशन की शिक्षा मंत्री के साथ मुलाकात कराई जाएगी, ताकि शिक्षक सीधे मंत्री के सामने अपनी मांगें और समस्याएं रख सकें।इसके बाद शिक्षा मंत्री के कार्यालय की ओर से प्रतिनिधियों को बैठक के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया।
आज शिक्षा मंत्री से होगी चर्चा
शिक्षक साझा मंच के मुताबिक, शिक्षा मंत्री के पीए अंकित चौहान ने फोन के जरिए प्रतिनिधियों को 26 अगस्त यानि आज दोपहर 1 बजे चर्चा के लिए बुलाया है। ऐसे समय में जब 27 अगस्त से शिक्षक अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की तैयारी में थे, एक दिन पहले होने वाली यह बैठक काफी महत्वपूर्ण हो गई है। अब शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि बैठक में उनकी दोनों मांगों को लेकर सरकार की ओर से क्या रुख सामने आता है।
मंच ने कहा- सिर्फ बैठक से आंदोलन नहीं रुकेगा
शिक्षक साझा मंच ने स्पष्ट किया है कि सरकार के साथ बातचीत का वह स्वागत करता है, लेकिन आंदोलन को लेकर फैसला मांगों के समाधान के आधार पर ही लिया जाएगा।मंच का कहना है कि यदि 26 अगस्त की बैठक में दोनों सूत्रीय मांगों को लेकर ठोस और स्पष्ट निर्णय सामने आता है, तभी आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। फिलहाल 27 अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियां जारी रहेंगी।शिक्षक साझा मंच ने प्रदेशभर के शिक्षकों से अपील की है कि वे आंदोलन में एकजुटता के साथ शामिल हों।
ये शिक्षक थे प्रतिनिधिमंडल में शामिल
कल हुई पुलिस प्रशासन के साथ चर्चा में शिक्षक साझा मंच की ओर से मनीष मिश्रा, देवेंद्र हरमुख, कौशल अवस्थी, मोहम्मद यासीर इरफान, अशोक धुर्वे, गिरीश साहू और कृष्णा वर्मा शामिल रहेंगे।अब पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि 26 अगस्त की बैठक में सरकार शिक्षकों की दो सूत्रीय मांगों पर क्या फैसला करती है। फिलहाल मंच का संदेश साफ है—बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन मांगों के समाधान तक आंदोलन की तैयारी जारी रहेगी।



















