दुर्ग। राजधानी रायपुर में जब से धरनास्थल को शहर से बाहर स्थानांतरित किया गया है, तब से प्रदर्शन की रणनीति भी संगठनों ने बदली है। अब प्रदर्शन का केंद्र राजधानी रायपुर के बजाय उन जिलों में होने लगा है जहां संबंधित विभाग के मंत्री का आवास है। हाल के दिनों शिक्षकों ने अपने प्रदर्शन को राजधानी रायपुर से कई मुद्दों पर दुर्ग शिफ्ट किया है। 27 अगस्त से शिक्षकों ने TET के मुद्दे पर जो प्रदर्शन प्रस्तावित किया था, वो भी शिक्षा मंत्री के निवास दुर्ग में केंद्रित किया गया था।
हाल के दिनों दुर्ग में कई प्रदर्शन हुए हैं, लिहाजा जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब दुर्ग शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर धरना-प्रदर्शन, रैली और जुलूस करना आसान नहीं होगा। आम जनता, मरीजों और विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने शहर के व्यस्त मार्गों पर धरना-प्रदर्शन, रैली और जुलूस के साथ टेंट लगाने और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन ने विरोध-प्रदर्शन के लिए तितुरडीह स्थित रिक्त परिसर को नया निर्धारित स्थल बनाया है।
व्यस्त मार्गों पर क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
इस संबंध में प्रशासन का कहना है कि शहर के प्रमुख मार्गों पर धरना-प्रदर्शन और रैलियों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। इससे आम नागरिकों के साथ अस्पताल जाने वाले मरीजों, उनके परिजनों और स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।इसी को देखते हुए कलेक्टर ने व्यस्त मार्गों पर इस तरह के आयोजनों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। इन स्थानों पर प्रदर्शन के लिए टेंट लगाने और लाउडस्पीकर का उपयोग करने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
तितुरडीह में बनेगा नया ‘जंतर मंतर’
धरना-प्रदर्शन के लिए प्रशासन ने तितुरडीह स्थित रिक्त परिसर को नया स्थल निर्धारित किया है। यह व्यवस्था नया रायपुर की तर्ज पर की गई है, जहां प्रदर्शन और आंदोलन के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध कराया गया है।अब संगठनों और विभिन्न पक्षों को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना है तो निर्धारित स्थल का उपयोग करना होगा। इससे शहर के मुख्य मार्गों पर यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विशेष परिस्थिति में लेनी होगी अनुमति
अगर किसी विशेष परिस्थिति में निर्धारित व्यस्त मार्ग पर धरना, प्रदर्शन, रैली या जुलूस निकालने की आवश्यकता होती है तो इसके लिए पहले से अनुमति लेनी होगी। प्रशासन के निर्देश के अनुसार संबंधित आयोजकों को कम से कम एक सप्ताह पहले एसडीएम सिटी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा।बिना अनुमति ऐसे आयोजन करने पर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा सकती है।
उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
आदेश का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर आयोजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जब्ती भी की जा सकती है।
प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंध का उद्देश्य विरोध की आवाज को रोकना नहीं, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की सुविधा को बनाए रखना है। निर्धारित स्थल उपलब्ध होने से प्रदर्शनकारियों को भी अपनी मांगें रखने के लिए एक स्थान मिलेगा और व्यस्त सड़कों पर जाम की स्थिति से बचा जा सकेगा।
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