रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का मुद्दा अब केवल सरकार और शिक्षकों के बीच का विवाद नहीं रह गया है। प्रदेश में TET को लेकर शिक्षकों के भीतर ही दो वर्गों—TET उत्तीर्ण और नन-TET शिक्षकों—के बीच मतभेद और टकराव खुलकर सामने आने लगा है। एक ओर नन-TET शिक्षक सेवा सुरक्षा को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर TET उत्तीर्ण शिक्षक प्रमोशन के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इस बीच शिक्षक संगठनों के भीतर भी मतभेद गहराने लगे हैं।
TET Vs Non-TET Teachers: आखिर शिक्षकों के बीच क्यों बढ़ रहा टकराव?
ताजा मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से सामने आया है, जहां सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के कार्यकारी जिलाध्यक्ष, मीडिया प्रभारी और ब्लॉक प्रवक्ता सहित 50 से अधिक पदाधिकारियों और शिक्षकों के इस्तीफे की खबर है। बताया जा रहा है कि TET उत्तीर्ण शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर संगठन के रुख से नाराज पदाधिकारियों ने यह फैसला लिया है।
कार्यकारी जिलाध्यक्ष अमृतलाल पटेल ने छोड़ा संगठन
सारंगढ़-बिलाईगढ़ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष अमृतलाल पटेल ने अपने पद से इस्तीफा देकर संगठन छोड़ दिया है। उन्होंने संगठन से जुड़े जिला और प्रांतीय स्तर के सभी ग्रुपों से भी खुद को अलग कर लिया है।
TET उत्तीर्ण शिक्षकों के प्रमोशन पर क्या है विवाद?
उनके साथ ब्लॉक प्रवक्ता त्रिनाथ राणा और मीडिया प्रभारी सदानंद पटेल ने भी अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि फेडरेशन के अन्य कई पदाधिकारियों और शिक्षकों ने भी संगठन से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।
सेवा सुरक्षा पर साथ, प्रमोशन के मुद्दे पर विरोध
अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए अमृतलाल पटेल ने कहा कि नन-TET शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के मुद्दे पर फेडरेशन द्वारा किए गए संघर्ष और प्रयासों से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सेवा सुरक्षा की लड़ाई में संगठन का रुख सही है, लेकिन TET उत्तीर्ण शिक्षकों के प्रमोशन के मुद्दे पर फेडरेशन का रुख उनके लिए आपत्तिजनक और अन्यायपूर्ण है।
अमृतलाल पटेल के अनुसार, वह वर्ष 2011 में TET उत्तीर्ण शिक्षक हैं और वरिष्ठता प्रभावित शिक्षकों की श्रेणी से जुड़े रहे हैं। उनका कहना है कि जब वरिष्ठता प्रभावित शिक्षक अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे, उस दौरान भी फेडरेशन का रुख स्पष्ट नहीं था।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे काफी जूनियर शिक्षकों का प्रमोशन पहले ही हो चुका है। अब जब TET उत्तीर्ण शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात हो रही है, तब फेडरेशन की ओर से इसमें बाधा डालने जैसा रुख अपनाया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने संगठन छोड़ने का फैसला किया।
40 से ज्यादा अन्य शिक्षकों ने भी छोड़ा पद
बताया जा रहा है कि कार्यकारी जिलाध्यक्ष, ब्लॉक प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी के अलावा 40 से अधिक अन्य शिक्षकों और पदाधिकारियों ने भी संगठन में अपने पदों से इस्तीफा दिया है। सामूहिक रूप से इस्तीफा देने वाले शिक्षकों ने TET उत्तीर्ण शिक्षकों के हितों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है।
शिक्षकों का कहना है कि संगठन को सेवा सुरक्षा के साथ-साथ उन शिक्षकों की समस्याओं और अधिकारों को भी समान गंभीरता से उठाना चाहिए, जिन्होंने TET उत्तीर्ण किया है और लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं।
TET उत्तीर्ण और नन-TET शिक्षकों के बीच बढ़ता मतभेद
छत्तीसगढ़ में TET का मुद्दा अब शिक्षकों के सामने एक जटिल स्थिति पैदा करता नजर आ रहा है। नन-TET शिक्षक सेवा सुरक्षा और अपने भविष्य को लेकर आंदोलनरत हैं, जबकि TET उत्तीर्ण शिक्षक अपनी योग्यता और नियमों के आधार पर प्रमोशन की मांग कर रहे हैं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 50 से ज्यादा पदाधिकारियों के इस्तीफे से क्यों मची हलचल?
दोनों पक्षों की मांगें अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन मुद्दों ने शिक्षक संगठनों के सामने संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ सेवा सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ TET उत्तीर्ण शिक्षकों के प्रमोशन और वरिष्ठता से जुड़े मुद्दे हैं।
संगठनों के सामने एकजुटता बनाए रखने की चुनौती
शिक्षक संगठनों के भीतर उभर रही यह स्थिति केवल एक संगठन तक सीमित नहीं बताई जा रही है। अलग-अलग शिक्षक संगठनों के सामने TET उत्तीर्ण और नन-TET शिक्षकों की अलग-अलग मांगों को लेकर चुनौती बनी हुई है।
मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चुनौती शिक्षकों की एकजुटता बनाए रखने की है। यदि TET विवाद के कारण शिक्षकों के बीच मतभेद और बढ़ते हैं, तो इसका असर प्रदेश में चल रहे शिक्षक आंदोलनों और संगठनों की ताकत पर भी पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठनों के सामने एकजुटता बचाने की बड़ी चुनौती
CG TET News: सेवा सुरक्षा के बाद अब प्रमोशन बना बड़ा मुद्दा
फिलहाल सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों के इस्तीफे ने यह साफ कर दिया है कि TET का मुद्दा अब शिक्षक संगठनों के भीतर भी नई राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार के फैसले और शिक्षक संगठनों के रुख पर सभी की नजर रहेगी।



















