न्यूज हेडलाइन टॉप न्यूज छत्तीसगढ़ ब्यूरोक्रेट वेब स्टोरी/शॉर्टस क्राइम शिक्षक/कर्मचारी देश/राज्य मौसम मनोरंजन खेल/खिलाड़ी राशिफल/धर्म सेहत ऑटोमोबाइल/मोबाइल बिजनेस नौकरी/सरकारी योजनाएं

---Advertisement---

CG Teacher News: सीनियर शिक्षकों को शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा, तो फिर जूनियर्स को प्रमोशन की तैयारी क्यों? शिक्षक मोर्चा की दो टूक, अधिनियम से पहले भर्ती शिक्षकों पर बाध्यता अन्याय, रखी ये पांच मांगें

CG TET News: शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने सेवारत शिक्षकों को TET से स्थायी मुक्ति की मांग की। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विभागीय TET और वरिष्ठ शिक्षकों का अहित नहीं होने का भरोसा दिया।

August 30, 2026 10:52 AM
CG TET News: TET से स्थायी मुक्ति की मांग, शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव ने दिया भरोसा
---Advertisement---11

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर सेवारत शिक्षकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रदेश के करीब एक लाख शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और पदोन्नति को लेकर उठे सवालों के बीच शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने TET की बाध्यता से स्थायी मुक्ति की मांग तेज कर दी है। मोर्चा ने तमिलनाडु की तर्ज पर केंद्र और राज्य सरकार से समुचित विधायी समाधान की पहल करने की मांग की है।

वहीं, शिक्षकों की मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की और भरोसा दिलाया कि किसी भी वरिष्ठ शिक्षक का अहित नहीं होने दिया जाएगा। मंत्री ने कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय TET आयोजित करने को लेकर सहमति जताते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इसकी तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए थे। लेकिन इस दौरान जूनियर्स को प्रमोशन की चल रही कवायद पर शिक्षक मोर्चा काफी निराश है।

TET के खिलाफ प्रदेशभर में हुई थी ‘मुक्ति रैली’

दरअसल शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने TET के मुद्दे को लेकर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में एक दिवसीय TET मुक्ति रैली आयोजित की थी। यह प्रदर्शन वीरेंद्र दुबे, संजय शर्मा और केदार जैन के नेतृत्व में किया गया।

मोर्चा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश के करीब एक लाख सेवारत शिक्षकों की नौकरी, सेवा सुरक्षा और पदोन्नति प्रभावित होने की आशंका है। इसी चिंता को लेकर शिक्षकों में व्यापक आक्रोश है।

रैली के बाद शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए बुलाया था। बैठक में शिक्षकों की समस्याओं को विस्तार से सुना गया और सरकार की ओर से समाधान के लिए सुझाव भी मांगे गए।

मंत्री ने कहा- वरिष्ठ शिक्षकों का नहीं होगा अहित

शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव को शिक्षक संघर्ष मोर्चा की ओर से प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे और धर्मेश शर्मा, प्रांतीय महासचिव शालेय शिक्षक संघ, ने प्रदेश के शिक्षकों की भावनाओं और TET से जुड़ी चिंताओं से अवगत कराया था।

मोर्चा ने चर्चा के दौरान कहा कि 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय और उससे संबंधित पुनर्विचार याचिका के निर्णय के अनुसार प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक शालाओं के कार्यरत शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक TET उत्तीर्ण करना आवश्यक है।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा का दावा है कि इस व्यवस्था का प्रभाव 2011-12 से पहले सेवा में आए शिक्षकों पर भी पड़ रहा है। इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और पदोन्नति जैसे हितलाभ खतरे में पड़ गए हैं।

शिक्षा मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिया था कि किसी वरिष्ठ शिक्षक का अहित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने विभागीय TET के विकल्प पर आगे बढ़ने के लिए अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां तेज करने के निर्देश भी दिए।

एक ओर मंत्री का भरोसा, दूसरी ओर प्रमोशन की जल्दबाजी पर सवाल

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने TET के मुद्दे पर विभागीय स्तर पर चल रही पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। मोर्चा का कहना है कि एक ओर शिक्षा मंत्री वरिष्ठ शिक्षकों के हितों की रक्षा का भरोसा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों के स्तर पर TET के बहाने जूनियर शिक्षकों को पदोन्नति देने की जल्दबाजी दिखाई जा रही है।

मोर्चा ने इसे विडंबना बताते हुए कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति संबंधित अधिनियम लागू होने से पहले निर्धारित नियमों और सेवा शर्तों के तहत हुई, उन पर बाद में लागू हुई पात्रता की बाध्यता डालना न्यायसंगत नहीं है।
शिक्षक संघर्ष मोर्चा का कहना है कि इस मामले में वरिष्ठता, सेवा सुरक्षा और पदोन्नति के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

TET से स्थायी मुक्ति के लिए विधायी समाधान की मांग

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों वीरेंद्र दुबे, धर्मेश शर्मा, चंद्रशेखर तिवारी, सत्येन्द्र प्रताप सिंह और जितेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा विभागीय TET के विकल्प पर आगे बढ़ने की बात स्वागत योग्य है, लेकिन इससे स्थायी समाधान की मांग खत्म नहीं होती।

मोर्चा ने केंद्र और राज्य सरकार से संसद के माध्यम से कानून बनाकर कार्यरत शिक्षकों को TET की बाध्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने की मांग की है। मोर्चा का कहना है कि तमिलनाडु की तर्ज पर ऐसा समुचित विधायी समाधान तलाशा जाना चाहिए, जिससे पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और भविष्य के हितलाभ सुरक्षित रह सकें।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने रखी पांच सूत्रीय मांग

शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षा मंत्री के समक्ष पांच सूत्रीय मांगें रखीं। इनमें TET से स्थायी मुक्ति से लेकर वेतन विसंगति और भर्ती-पदोन्नति नियम में बदलाव की मांग शामिल है।

मोर्चा की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

1. न्यायालयीन उपचार:
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रभाव को समाप्त करने के लिए तत्काल अपील, पुनर्विचार याचिका अथवा क्यूरेटिव याचिका दायर की जाए। साथ ही 2011-12 से पहले सेवा में आए शिक्षकों को TET की भूतलक्षी बाध्यता से मुक्त रखा जाए।
2. विधायी उपाय:
राज्य सरकार और विधानसभा के माध्यम से केंद्र सरकार तथा संसद से आवश्यक विधायी संशोधन, नया कानून या अध्यादेश लाकर पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए TET की बाध्यता समाप्त करने की पहल की जाए।
3. विभागीय TET:
यदि तत्काल स्थायी विधायी समाधान नहीं निकलता है तो 31 अगस्त 2028 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय TET आयोजित की जाए।
4. पूर्व सेवा की गणना:
शिक्षकों की पूर्व सेवा की गणना कर उन्हें सभी आवश्यक हितलाभ प्रदान किए जाएं।
5. वेतन और भर्ती-पदोन्नति नियम:
केंद्रीय वेतनमान प्रदान कर वेतन विसंगति दूर की जाए तथा भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त या आवश्यक संशोधन किया जाए।

दो साल में कम से कम चार बार विभागीय TET की मांग

मोर्चा ने विभागीय TET को लेकर सरकार के सामने विस्तृत सुझाव भी रखे हैं। शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने मांग की है कि 31 अगस्त 2028 तक की समयसीमा को देखते हुए अगले दो वर्षों में कम से कम चार बार विभागीय TET आयोजित की जाए।
इससे उन शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सकेंगे, जो पहली या किसी एक परीक्षा में सफल नहीं हो पाते हैं।
इसके साथ ही SCERT के मौजूदा TET पाठ्यक्रम की समीक्षा कर कार्यरत शिक्षकों के अनुकूल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के लिए अलग-अलग पाठ्यक्रम तैयार करने की मांग की गई है।
मोर्चा ने यह भी सुझाव दिया है कि SCERT द्वारा पाठ्यक्रम के अनुरूप ऑनलाइन तैयारी मॉड्यूल उपलब्ध कराया जाए और विभागीय TET में न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 प्रतिशत रखा जाए।

‘खेल के बीच नियम बदलने जैसा’ बताया

शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि संगठन सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करता है, लेकिन शिक्षकों पर TET को लेकर दिए गए निर्णय से असहमत है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम अगस्त 2009 में लागू हुआ, जबकि छत्तीसगढ़ में इसे 2012 में लागू किया गया। उनके अनुसार, अधिनियम लागू होने से पहले निर्धारित प्रक्रिया और सेवा शर्तों के तहत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू हुई पात्रता को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति ऐसी है जैसे खेल के बीच में खेल के नियम बदल दिए जाएं। मोर्चा का मानना है कि पहले से सेवारत शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में न्यायोचित समाधान होना चाहिए।

विभागीय TET की तैयारी का आश्वासन

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों की पूरी बात सुनने के बाद विभागीय TET के प्रस्ताव पर सहमति जताई। उन्होंने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को विभागीय TET की तैयारियां तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षक मोर्चा की ओर से दिए गए ऐसे सुझावों को स्वीकार किया जाए, जिनमें कोई वैधानिक संकट नहीं है।
मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि विभागीय TET को तत्काल राहत के विकल्प के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन TET से स्थायी मुक्ति के लिए विधायी समाधान की मांग जारी रहेगी।

शनिवार को स्कूल लगाने के सुझाव पर भी मंत्री की सहमति

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने हायर सेकेंडरी स्कूलों में स्काउट, रेडक्रॉस, योग-व्यायाम, नैतिक शिक्षा और अन्य गतिविधियों के लिए शनिवार को सुबह स्कूल लगाने के आदेश जारी करने का आग्रह भी शिक्षा मंत्री से किया।

मोर्चा के अनुसार, शिक्षा मंत्री ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए जल्द आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षक संगठनों और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बीच हुई वार्ता को मोर्चा ने सौहार्दपूर्ण बताया।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे ये पदाधिकारी

शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल में शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे, टीचर्स एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष संजय शर्मा और संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष केदार जैन शामिल रहे।

इसके अलावा धर्मेश शर्मा, सुधीर प्रधान, ताराचंद जायसवाल, चंद्रशेखर तिवारी, जितेंद्र शर्मा, कृष्णराज पांडेय सहित अन्य पदाधिकारी भी वार्ता में शामिल हुए।
मोर्चा के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों की अन्य समस्याओं को भी शिक्षा मंत्री के समक्ष रखा। मंत्री ने फिलहाल TET जैसे ज्वलंत मुद्दे के समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही।

बड़ी संख्या में शिक्षक पदाधिकारियों ने उठाई आवाज

शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों में सुनील सिंह, विष्णु शर्मा, डॉ. सांत्वना ठाकुर, सत्येंद्र सिंह, विवेक शर्मा, गजराज सिंह, राजेश शर्मा, शैलेश सिंह, प्रह्लाद जैन, सन्तोष मिश्रा, सन्तोष शुक्ला, शिवेंद्र चंद्रवंशी, दीपक वेंताल, यादवेंद्र दुबे, सर्वजीत पाठक, मंटू खैरवार, पवन दुबे, नंदकुमार अठभैया, भोजराम पटेल, विनय सिंह, आशुतोष सिंह, भानु डहरिया, रवि मिश्रा, बिजेंद्रनाथ यादव, जितेंद्र गजेंद्र, अजय वर्मा, कृष्णराज पांडेय, घनश्याम पटेल, बुध्दहेश्वर शर्मा, प्रदीप पांडेय, उपेंद्र सिंह, पवन साहू, मनोज पवार, देवव्रत शर्मा, कैलाश रामटेके, अब्दुल आसिफ खान, सरवर हुसैन, कुलदीप सिंह चौहान, नेमीचंद भास्कर, राजेश यादव, अमित सिन्हा, विक्रम राजपूत, सुशील शर्मा, विजय जाटवर, शशि कठोलिया, विजय बेलचंदन, अशोक देशमुख, तिलक सेन और द्वारिका भारद्वाज आदि ने सरकार से मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा का कहना है कि विभागीय TET के आयोजन से तत्काल राहत मिल सकती है, लेकिन सेवारत शिक्षकों के लिए स्थायी समाधान तभी संभव होगा, जब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर विधायी स्तर पर स्पष्ट व्यवस्था करें। मोर्चा ने संकेत दिया है कि शिक्षकों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रदेश के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी पहल और संघर्ष की रणनीति पर काम किया जाएगा।

 

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories

Leave a Comment